Himachal News: अडानी एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड (एएएफएल) ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में एक बड़े विस्तार की घोषणा की है। कंपनी अब राज्य में सेब के बाद ‘स्टोन फ्रूट’ श्रेणी, विशेषकर चेरी की खरीद शुरू करने जा रही है। इस कदम से न केवल फलों की भंडारण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के बाजार और बेहतर दाम मिलने का रास्ता भी साफ होगा। यह पहल हिमाचल के कृषि परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
चेरी और स्टोन फ्रूट्स के लिए आधुनिक हुए स्टोरेज सेंटर
अडानी एग्री फ्रेश ने हिमाचल प्रदेश में स्थित अपने छह ‘कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर’ (CA) स्टोरेज सेंटर्स को चेरी के भंडारण के लिए अपग्रेड कर दिया है। 7 मई को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सीईओ मनीष अग्रवाल ने बताया कि कंपनी आने वाले सीजन से चेरी की सीधी खरीद शुरू करेगी। इसके बाद आड़ू और प्लम जैसे अन्य स्टोन फ्रूट्स के वितरण पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कंपनी अपनी अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए फलों की ‘शेल्फ लाइफ’ बढ़ाने पर काम कर रही है।
किसानों को मिला 1,500 करोड़ का सीधा भुगतान
एएएफएल साल 2006 से हिमाचल प्रदेश में सक्रिय है और अब तक 17,000 से अधिक सेब उत्पादक किसानों के साथ जुड़ चुकी है। कंपनी ने पिछले दो दशकों में लगभग तीन लाख टन सेब की खरीद की है। इसके बदले बागवानों को सीधे उनके बैंक खातों में करीब 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। कंपनी ने राज्य में 25,000 टन की कुल भंडारण क्षमता विकसित की है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों की आय स्थिर रहती है।
ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ेंगे हिमाचल के फल
मनीष अग्रवाल ने ‘फ्रूट होराइजन 2026’ कार्यक्रम में भारतीय फलों की वैल्यू चेन को वैश्विक बनाने पर जोर दिया। कंपनी का लक्ष्य हिमाचल के छोटे बागवानों को बड़े खुदरा विक्रेताओं से जोड़ना है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और बागवानी विभाग के साथ मिलकर कंपनी नई तकनीकों का विस्तार कर रही है। चेरी और प्लम जैसे फलों की मांग शहरों में बढ़ रही है। अडानी ग्रुप के इस प्रवेश से इन फलों की व्यवस्थित मार्केटिंग और ब्रांडिंग सुनिश्चित होगी।
हिमाचल के छह केंद्रों पर बढ़ेगी सुविधाएं
आने वाले सीजन में कंपनी अपने बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करेगी। चेरी के लिए विशेष कोल्ड चेन ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था की जा रही है ताकि फल खराब न हों। एएएफएल के अनुसार, हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां उच्च गुणवत्ता वाले स्टोन फ्रूट्स के लिए उपयुक्त हैं। किसानों को अब अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा। कंपनी का पारदर्शी खरीद तंत्र और तत्काल भुगतान मॉडल बागवानों के बीच काफी लोकप्रिय रहा है।

