कांगड़ा में पहाड़ों का सीना चीर रहा राधा स्वामी सत्संग ब्यास! एनजीटी की जांच में खुले कई राज, क्या धर्म की आड़ में हुआ खिलवाड़?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में परौर स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास के विस्तार कार्यों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ों की कटाई और खड्डों में मलबा फेंकने का यह गंभीर मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दहलीज पर पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों की जांच रिपोर्ट एनजीटी को सौंप दी है। स्थानीय ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद इस संस्था पर नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने खोली पोल

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को सौंपी अपनी हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सत्संग घर के निर्माण के लिए पहाड़ों को अवैध रूप से काटा गया है। निर्माण से निकले मलबे को सीधे ताहल खड्ड और स्थानीय नालों में फेंका जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंची है, बल्कि पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बदलने की कोशिश भी की गई है। अप्रैल में हुए निरीक्षण में नालों के किनारे भारी मात्रा में कचरा भी पाया गया।

हजारों कनाल भूमि पर अवैध विस्तार का आरोप

राधा स्वामी सत्संग ब्यास प्रबंधन घनेटा, धोरण, दरंग और परौर गांवों की हजारों कनाल भूमि पर नए सत्संग घर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि धर्म की आड़ में पर्यावरण के साथ सरेआम छेड़छाड़ की जा रही है। ग्रामीणों ने इस विनाश के खिलाफ एक संघर्ष समिति का गठन किया और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन ने हस्तक्षेप कर मामला एनजीटी को भेजा, लेकिन आरोप है कि निर्माण कार्य अब भी जारी है।

बिना अनुमति और टीसीपी की मंजूरी के चल रहा काम

एनजीटी की 25 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट से पता चला है कि इस विशाल निर्माण कार्य के लिए कोई वैधानिक अनुमति नहीं ली गई है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) विभाग की मंजूरी के बिना ही पहाड़ों की खुदाई की जा रही है। इसके अलावा, रिपोर्ट में 35 हरे पेड़ों की अवैध कटाई की भी पुष्टि हुई है। खड्डों में फेंके जा रहे मलबे के कारण निचले क्षेत्रों में बसे गांवों पर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा मंडराने लगा है।

नोटिस और जुर्माने के बाद भी नहीं रुका निर्माण

टाउन प्लानिंग विभाग पालमपुर ने प्रबंधन को कई चेतावनी और नोटिस जारी किए, लेकिन काम नहीं रोका गया। राज्य प्रदूषण बोर्ड ने भी 10 और 17 अप्रैल को नोटिस थमाए थे। जांच में निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजाम भी बेहद कमजोर पाए गए हैं। एनजीटी ने फिलहाल सत्संग कमेटी को दोषी मानते हुए उन पर जुर्माना लगाया है। कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने पुष्टि की है कि प्रबंधन ने एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करवाया है।

Hot this week

Related News

Popular Categories