New Delhi News: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने निजी संस्थानों द्वारा संचालित पीएफ ट्रस्टों के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने नई गाइडलाइंस को मंजूरी दी है ताकि कर्मचारियों की जमा पूंजी अधिक सुरक्षित रहे। अब ये ट्रस्ट ईपीएफओ द्वारा तय वार्षिक ब्याज दर से 2 प्रतिशत से अधिक ब्याज नहीं दे पाएंगे। सरकार का यह कदम वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और किसी भी संभावित जोखिम को रोकने के लिए उठाया गया है।
ब्याज दरों पर कैप और रिस्क-आधारित ऑडिट प्रणाली
सरकार ने अब पीएफ ट्रस्टों द्वारा दिए जाने वाले अतिरिक्त ब्याज पर लगाम लगा दी है। दरअसल, कुछ छोटे ट्रस्ट अधिक रिटर्न का लालच देकर वित्तीय संतुलन बिगाड़ रहे थे। नए नियमों के तहत अब हर साल अनिवार्य ऑडिट की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय अब ‘रिस्क-आधारित निगरानी’ प्रणाली काम करेगी। इसका मतलब है कि केवल उन्हीं ट्रस्टों की गहन जांच होगी जिनमें नियमों के उल्लंघन की आशंका होगी। ईमानदार और पारदर्शी कंपनियों को बार-बार होने वाले ऑडिट से बड़ी राहत मिलेगी।
मर्जर और अधिग्रहण की स्थिति में स्टेटस रहेगा बरकरार
कॉर्पोरेट जगत के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि अब कंपनियों के विलय या अधिग्रहण (M&A) पर उनका ‘एग्जेंप्शन स्टेटस’ खत्म नहीं होगा। इससे पहले मर्जर की स्थिति में पीएफ ट्रस्ट का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता था। नए प्रावधानों से कारोबार में निरंतरता बनी रहेगी और कर्मचारियों का पीएफ प्रबंधन भी प्रभावित नहीं होगा। वर्तमान में देश में लगभग 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियां और पीएफ ट्रस्ट स्वयं संचालित कर रहे हैं, जिन्हें अब इन नियमों का पालन करना होगा।
ट्रस्ट बंद करने की प्रक्रिया हुई और भी पारदर्शी
यदि कोई संस्थान अपना पीएफ ट्रस्ट बंद करना चाहता है, तो उसे अब कड़े नियमों से गुजरना होगा। कंपनी को ट्रस्ट समापन के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, उन सभी खातों को ईपीएफओ में ट्रांसफर करना होगा जिनका केवाईसी (KYC) अधूरा है या जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से पीएफ प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों के हितों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सर्वोपरि
ईपीएफ अधिनियम 1952 की धारा 17 के तहत छूट प्राप्त इन संस्थानों को अपने कर्मचारियों को ईपीएफओ के समान या उससे बेहतर सुविधाएं देना अनिवार्य है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएफ ट्रस्टों की वित्तीय सेहत का सीधा असर करोड़ों कामगारों के भविष्य पर पड़ता है। इसीलिए निगरानी तंत्र को अधिक चुस्त-दुरुस्त किया गया है। इन संशोधनों से न केवल व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भविष्य निधि की निकासी और हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पहले से अधिक सुगम हो जाएगी।


