हिमाचल प्रदेश: शिमला नगर निगम ने कचरा प्रबंधन के लिए उतारे 10 इलेक्ट्रिक वाहन, सीएम सुक्खू ने दिखाई हरी झंडी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को शिमला नगर निगम के लिए 10 विद्युत कचरा संग्रहण वाहनों को रवाना किया। शिमला अब कचरा प्रबंधन बेड़े को पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड में बदलने वाला प्रदेश का पहला शहरी निकाय बन गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक हिमाचल को ‘हरित राज्य’ बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह नई पहल पर्यावरण संरक्षण और ई-गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

शिमला की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सफल रहा परीक्षण

मुख्यमंत्री सुक्खू ने सचिवालय से वाहनों को रवाना करते हुए बताया कि इनका सफल परीक्षण नवंबर 2025 में किया गया था। शिमला के ऊबड़-खाबड़ और कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में इन वाहनों का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। प्रत्येक इलेक्ट्रिक वाहन की कचरा ढोने की क्षमता एक टन है। प्रशासन ने इन आधुनिक गाड़ियों को 13.98 लाख रुपये की प्रति वाहन लागत से खरीदा है। ये वाहन शहर की संकरी गलियों में भी सुचारू रूप से कचरा संग्रहण करने में सक्षम हैं।

एक बार चार्ज होने पर 150 किलोमीटर तक का सफर

इन वाहनों के कुशल संचालन के लिए नगर निगम के पार्किंग स्थलों पर व्यापक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। प्रत्येक वाहन एक बार फुल चार्ज होने पर लगभग 130 से 150 किलोमीटर की दूरी आसानी से तय कर सकता है। इससे कचरा संग्रहण की प्रक्रिया अधिक तेज और सुगम होगी। सुचारू चार्जिंग सुविधा सुनिश्चित होने से संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। तकनीक का यह उपयोग शहर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम है।

परिचालन व्यय में कमी और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

सीएम ने शिमला नगर निगम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ई-गतिशीलता उनके पहले बजट की मुख्य प्राथमिकता थी। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच विद्युत वाहनों को अपनाने से नगर निकाय के खर्चों में बड़ी कटौती होगी। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि वायु प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होगा। राज्य सरकार सक्रिय रूप से टिकाऊ कचरा प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल नीतियों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

टिकाऊ कचरा प्रबंधन के लिए ऐतिहासिक कदम

राजधानी शिमला को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए यह पहल एक नई शुरुआत है। चरणबद्ध योजना के तहत अन्य नगर निकायों में भी ऐसे ही विद्युत वाहन शामिल किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि यह कदम राज्य के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। इससे स्वच्छ भारत अभियान को भी बल मिलेगा। स्थानीय प्रशासन ने इन वाहनों के रूट और चार्जिंग समय को व्यवस्थित कर दिया है। आने वाले समय में शिमला का पूरा सफाई बेड़ा पूरी तरह से विद्युत संचालित होगा।

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