Himachal News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने उच्च शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मंगलवार को कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह के निर्देशानुसार अकादमिक काउंसिल की स्थायी समिति की बैठक हुई। आचार्य बीके शिवराम की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया। समिति ने महाविद्यालय स्तर पर नए कौशल विकास कार्यक्रमों और आधुनिक विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रमों को अपनी आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होंगे बीएससी एआई और डेटा साइंस
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का संकल्प लिया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कॉलेजों में बीएससी डेटा साइंस और बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा महाविद्यालय स्तर पर एबिलिटी डेवलपमेंट विकास कार्यक्रम भी संचालित होंगे। ये नए कोर्स छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने में मदद करेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमों को मंजूरी
समिति ने बैठक के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। इसके तहत तृतीय से छठे सेमेस्टर के संशोधित पाठ्यक्रमों को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया। स्नातकोत्तर (PG) स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी नए सिलेबस को स्वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्त राज्य के महाविद्यालयों में क्रेडिट फ्रेमवर्क से जुड़े दिशा-निर्देशों को आवश्यक नियमों के साथ लागू किया जाएगा ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता और बेहतर हो सके।
नौकरीपेशा लोगों के लिए शुरू होगा अंशकालिक पीएचडी कार्यक्रम
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए विश्वविद्यालय ने एक बड़ी राहत दी है। बैठक में अंशकालिक (Part-Time) पीएचडी कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी गई। इससे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रोफेशनल्स अब अपनी नौकरी के साथ शोध कार्य जारी रख सकेंगे। समिति का मानना है कि इस कदम से शोध और नवाचार के क्षेत्र में विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ेगी। यह कार्यक्रम गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाएगा।
कौशल आधारित शिक्षा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
बैठक का समापन शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को समकालीन और कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस दौरान सभी संकायों के अधिष्ठाता और नामित सदस्य उपस्थित रहे। अधिकारियों ने जोर दिया कि ये नए बदलाव हिमाचल प्रदेश में शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे। आने वाले समय में विश्वविद्यालय डिजिटल शिक्षा और तकनीकी नवाचार के नए मापदंड स्थापित करने के लिए तैयार है।


