भारत में 800 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान: मॉर्गन स्टेनली ने निवेश-जीडीपी अनुपात बढ़ने का जताया भरोसा

Business News: अमेरिकी दिग्गज निवेश फर्म मॉर्गन स्टेनली ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपनी ताजा रिपोर्ट ‘अपॉर्चुनिटीज एंड रिस्क एमिड कॉन्फ्लिक्ट’ जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बावजूद भारत एक सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है। फर्म ने अनुमान लगाया है कि भारत का इन्वेस्टमेंट-टू-जीडीपी रेशियो (Investment-to-GDP Ratio) वित्त वर्ष 2030 तक 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वर्तमान में यह अनुपात 36.7 प्रतिशत है, जिसे पहले मॉर्गन स्टेनली ने 36.5 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया था।

अगले पांच वर्षों में 800 अरब डॉलर का निवेश

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अगले पांच वर्षों में लगभग 800 अरब डॉलर का अतिरिक्त पूंजीगत निवेश (Capex) देखने को मिल सकता है। इस भारी भरकम निवेश का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा एनर्जी, डेटा सेंटर्स और डिफेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। फर्म का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को मजबूत कर रहा है। यह सकारात्मक बदलाव भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारतीय शेयर बाजार और मुनाफे पर बड़ा असर

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि पूंजीगत व्यय में इस उछाल का भारतीय शेयर बाजार पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मजबूत निवेश चक्र से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कॉरपोरेट मुनाफे की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी। इससे आने वाले वर्षों में कंपनियों की आय में 15 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से वृद्धि होने की उम्मीद है। मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि इस गति के साथ भारतीय बाजार वित्त वर्ष 2031 की संभावित आय के 10 गुना स्तर तक पहुंच सकता है।

ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

भारत वर्तमान में अपनी 85 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। मध्य पूर्व के संकट को देखते हुए, सरकार अब रणनीतिक तेल भंडारों के विस्तार और घरेलू कोयला उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके अतिरिक्त, अक्षय ऊर्जा और परमाणु परियोजनाओं को भी गति दी जा रही है। उर्वरक क्षेत्र में भी डीएपी और एमओपी जैसे आयातित इनपुट्स पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाकर सरकार राजकोषीय घाटे और सब्सिडी के बोझ को कम करने का प्रयास कर रही है।

डिफेंस और डेटा सेंटर बनेंगे विकास के इंजन

रक्षा क्षेत्र में भारत एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2031 तक भारत अपना रक्षा व्यय जीडीपी के 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत कर सकता है। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी और स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। वहीं, डेटा स्थानीयकरण नीतियों और भू-राजनीतिक सुरक्षा के कारण भारत एक प्रमुख डिजिटल डेटा सेंटर हब बन रहा है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 2031 तक मौजूदा 1.8 गीगावॉट से बढ़कर 10.5 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी।

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