New Delhi News: राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने एम्बेसी डेवलपमेंट्स के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को रद्द कर दिया है। न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के पुराने आदेश को पलट दिया है। यह फैसला रियल एस्टेट कंपनी के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। केनरा बैंक ने इस मामले में कंपनी के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस अहम फैसले के बाद कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई है।
केनरा बैंक का दावा और पुराना आदेश
दिसंबर महीने में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने केनरा बैंक की अपील स्वीकार की थी। बैंक का दावा था कि एम्बेसी डेवलपमेंट्स ने पुराने कर्ज के लिए कॉर्पोरेट गारंटर की भूमिका निभाई थी। यह कर्ज सिन्नर थर्मल पावर लिमिटेड को दिया गया था। बैंक के अनुसार कंपनी लगभग तीन सौ बहत्तर करोड़ रुपये की देनदार थी। इस दावे के आधार पर दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब न्यायाधिकरण ने इस पूरी प्रक्रिया को गलत ठहराया है।
धारा दस ए के तहत मिली बड़ी राहत
न्यायाधिकरण ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि यह मामला कानूनी सुरक्षा के दायरे में आता है। अदालत ने दिवाला और दिवालियापन संहिता की धारा दस ए का हवाला दिया है। इस धारा के तहत कोरोना महामारी के दौरान हुए डिफॉल्ट पर दिवालिया कार्यवाही नहीं की जा सकती है। यह रोक पच्चीस मार्च दो हजार बीस के बाद एक साल तक प्रभावी थी। बैंक द्वारा किया गया दावा इसी विशेष कानूनी अवधि के कारण अमान्य है।
कंपनी की आर्थिक स्थिति और व्यवसाय
इस फैसले पर एम्बेसी डेवलपमेंट्स ने खुशी जताई है। कंपनी के अध्यक्ष जीतू विरवानी ने कहा कि उनका पक्ष पूरी तरह सही साबित हुआ है। एक पुराने वित्तीय पत्र को गलत तरीके से कॉर्पोरेट गारंटी समझ लिया गया था। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस कानूनी विवाद से उनके सामान्य कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी की वित्तीय स्थिति बहुत मजबूत बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष में कंपनी ने शानदार प्री-सेल्स दर्ज की है।

