पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश का तीस्ता प्रोजेक्ट पर बड़ा फैसला, अब चीन से मांगेगा मदद

Dhaka News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश ने बड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। लंबे समय से अटके तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर बांग्लादेश ने अब भारत का इंतजार नहीं करने का फैसला किया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने स्पष्ट किया है कि वे इस महत्वपूर्ण जल परियोजना के लिए अब चीन का रुख करेंगे। उनका यह बयान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नया मोड़ ला सकता है।

चीन दौरे पर जाएंगे विदेश मंत्री खलीलुर रहमान

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान बहुत जल्द चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं। रहमान ने बताया कि बीजिंग में उनकी वार्ता के मुख्य एजेंडे में तीस्ता जल परियोजना शामिल होगी। तीन दिवसीय दौरे के दौरान वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी से सीधे मुलाकात करेंगे। इसके अलावा बांग्लादेश चीन से कम ब्याज दर पर कर्ज और आर्थिक निवेश की बड़ी मांग करेगा। नई सरकार इन विकास परियोजनाओं पर काफी तेजी से काम कर रही है।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों पर प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी जीत और नई सरकार पर भी बांग्लादेश ने प्रतिक्रिया दी है। रहमान ने स्पष्ट कहा कि बंगाल में अभी नई सरकार का गठन होना बाकी है। नई सरकार की नीतियां क्या होंगी, इसका फैसला उन्हें ही करना है। विदेश मंत्री ने साफ किया कि वे केवल इंतजार में हाथ पर हाथ धरकर बिल्कुल नहीं बैठ सकते। तीस्ता नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए यह परियोजना सीधे जीवन-मरण का सवाल है।

तीस्ता नदी पर भारत और बांग्लादेश का विवाद

तीस्ता नदी के पानी बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच दशकों से विवाद चल रहा है। साल 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ढाका दौरे पर एक समझौते की रूपरेखा बनी थी। इसके तहत बांग्लादेश को 37.5 प्रतिशत और भारत को 42.5 प्रतिशत पानी मिलना था। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े विरोध के कारण यह समझौता कभी लागू नहीं हो सका। बांग्लादेश इस नदी में अपना बराबर हिस्सा मांगता है।

चीन का दखल और पुरानी जल संधियां

भारत और बांग्लादेश आपस में कुल 54 नदियां साझा करते हैं। इनमें से अब तक केवल गंगा और कुशियारा नदी पर ही जल समझौता हो पाया है। साल 1983 में तीस्ता को लेकर एक अस्थायी समझौता जरूर हुआ था लेकिन वह भी कारगर साबित नहीं हुआ। इस देरी को देखते हुए ही शेख हसीना सरकार ने साल 2019 में तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन परियोजना शुरू की थी। इस बड़ी परियोजना के लिए बांग्लादेश ने चीन से मदद मांगी थी।

कूटनीतिक दबाव और भारत की भावी रणनीतियां

बांग्लादेश का चीन के करीब जाना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तीस्ता परियोजना में चीन की सक्रियता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को सीधे तौर पर बढ़ाएगी। बंगाल में अब नई सरकार के गठन के बाद इस संवेदनशील मुद्दे पर कूटनीतिक बातचीत के नए रास्ते खुल सकते हैं। भारत सरकार को अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने के लिए जल्द ही कोई ठोस नीति लानी होगी।

Hot this week

Related News

Popular Categories