Himachal News: हिमाचल प्रदेश के 51 शहरी निकायों के चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है। कुल 449 पदों के लिए अब 1411 उम्मीदवारों के बीच चुनावी मुकाबला होगा। हालांकि, 6 मई को नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की अंतिम संख्या में बदलाव संभव है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, कई क्षेत्रों में बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण कुछ प्रत्याशी मैदान से हट सकते हैं। प्रशासन ने निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
नामांकन प्रक्रिया और छंटनी का ब्यौरा
राज्य में पार्षद पदों के लिए कुल 1426 उम्मीदवारों ने अपने आवेदन जमा किए थे। जांच के दौरान चुनाव आयोग ने 15 नामांकन पत्र विभिन्न कारणों से रद्द कर दिए। इसके बाद अब चुनावी मैदान में 1411 प्रत्याशी शेष बचे हैं। नामांकन प्रक्रिया 29 अप्रैल को शुरू हुई थी, जिसमें पहले दिन 155 पर्चे भरे गए। दूसरे दिन 30 अप्रैल को यह संख्या 550 रही। अंतिम दिन यानी 2 मई को सर्वाधिक 721 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे।
दोहरी उम्मीदवारी पर आयोग का सख्त रुख
जांच के दौरान आयोग ने पाया कि कई उम्मीदवारों ने एक साथ दो पदों के लिए नामांकन दाखिल किया था। चुनाव आयोग ने ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए अतिरिक्त नामांकन पत्र खारिज कर दिए। नियमानुसार, अब एक उम्मीदवार केवल एक ही पद पर चुनाव लड़ने के लिए पात्र माना गया है। चार मई को सभी दस्तावेजों की गहनता से जांच की गई। 6 मई को नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होते ही सभी वैध प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए जाएंगे।
ईवीएम के माध्यम से 17 मई को होगी वोटिंग
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान की तारीख और समय की घोषणा पहले ही कर दी है। प्रदेश के शहरी निकायों के लिए 17 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के माध्यम से संपन्न कराई जाएगी। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए जा रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रचार अभियान में जुटे राजनीतिक दल
नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव प्रचार में और तेजी आने की उम्मीद है। कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य दल अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बना रहे हैं। 6 मई को निर्दलीय उम्मीदवारों की स्थिति साफ होते ही चुनावी सरगर्मियां चरम पर होंगी। उम्मीदवार अब घर-घर जाकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार के निकाय चुनाव प्रदेश की भविष्य की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


