तमिलनाडु में सत्ता का संघर्ष: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, लेकिन राजभवन में फंसा पेंच

Chennai News: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक रस्साकसी तेज हो गई है। टीवीके (TVK) प्रमुख विजय ने कांग्रेस के समर्थन के साथ राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हालांकि, राज्यपाल फिलहाल बहुमत के आंकड़ों को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। इस अनिश्चितता के कारण सात मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह टलने के आसार बढ़ गए हैं।

द्रविड़ राजनीति के कट्टर विरोधियों में हाथ मिलाने की सुगबुगाहट

टीवीके को रोकने के लिए राज्य में एक अभूतपूर्व राजनीतिक समीकरण बनता दिख रहा है। द्रविड़ राजनीति के दो धुर विरोधी दल, द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (ADMK) के बीच बातचीत की चर्चाएं गर्म हैं। हालांकि दोनों दलों ने आधिकारिक तौर पर इस पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस गठबंधन की संभावनाओं ने हलचल मचा दी है। कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन देने के बाद यह कवायद और तेज हुई है।

विधायकों की बाड़ेबंदी और रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी

राज्य में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के बीच अन्नाद्रमुक ने अपने नवनिर्वाचित विधायकों को पुडुचेरी के एक सुरक्षित रिजॉर्ट में स्थानांतरित कर दिया है। यह कदम कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन देने के कुछ ही घंटों बाद उठाया गया। उधर, द्रमुक ने कांग्रेस के इस फैसले को ‘धोखा’ और ‘पीठ में छुरा घोंपना’ करार दिया है। द्रमुक नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने गठबंधन धर्म का उल्लंघन कर जनादेश का अपमान किया है।

राजभवन की भूमिका और बहुमत का कठिन गणित

234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 117 सीटों की आवश्यकता है। विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन दो सीटों पर विजय की जीत के कारण प्रभावी संख्या 107 है। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बावजूद विजय को अभी भी 5 और विधायकों की जरूरत है। राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि न्योता देने से पहले बहुमत का पुख्ता सबूत पेश करना अनिवार्य होगा।

कांग्रेस का भाजपा पर हमला और भविष्य की संभावनाएं

कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने राजभवन के माध्यम से राजनीति करने का आरोप लगाते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने तर्क दिया कि बहुमत साबित करने का असली स्थान विधानसभा है, न कि राजभवन। टीवीके अब वामपंथी दलों और वीसीके (VCK) से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, अन्नाद्रमुक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हाल में टीवीके को समर्थन नहीं देगी, जिससे सरकार गठन की प्रक्रिया और पेचीदा हो गई है।

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