SpaceX प्रमुख एलन मस्क ने भारतीय स्टार्टअप GalaxEye को दी बधाई, ‘मिशन दृष्टि’ की सफलता को पीएम मोदी ने सराहा

Space News: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘गैलेक्सीआई’ (GalaxEye) ने अपने ‘मिशन दृष्टि’ उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है। इस बड़ी कामयाबी पर स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने स्टार्टअप को बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस मिशन की सराहना करने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर लिखा, “बधाई हो।” यह वैश्विक स्तर पर भारतीय निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती स्वीकार्यता का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया भारत की अंतरिक्ष यात्रा का गौरवशाली क्षण

रविवार को ‘मिशन दृष्टि’ की सफल लॉन्चिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिबिंब बताया। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि गैलेक्सीआई का यह मिशन हमारी अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इसे दुनिया का पहला ‘ऑप्टोसार’ (OptoSAR) उपग्रह और भारत में निर्मित सबसे बड़ा निजी उपग्रह करार दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह सफलता राष्ट्र निर्माण और तकनीकी उन्नति के प्रति भारतीय युवाओं के जुनून और अटूट संकल्प को बखूबी दर्शाती है।

कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए भरी उड़ान

गैलेक्सीआई के इस उपग्रह को रविवार को कैलिफोर्निया स्थित लॉन्चिंग पैड से एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के भरोसेमंद फाल्कन-9 रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में स्थापित किया गया। यह लॉन्चिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह निजी क्षेत्र के सहयोग से भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करती है। ‘मिशन दृष्टि’ के सफल होने से अब भारत के पास अंतरिक्ष से डेटा एकत्र करने की एक उन्नत क्षमता होगी, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

क्या है ऑप्टोसार तकनीक और क्यों है यह बेहद खास?

गैलेक्सीआई का यह उपग्रह दुनिया का पहला ऐसा सैटेलाइट है जो ‘ऑप्टोसार’ तकनीक का उपयोग करता है। पारंपरिक उपग्रह या तो ऑप्टिकल कैमरों पर निर्भर होते हैं (जो बादलों और अंधेरे में काम नहीं करते) या रडार (SAR) पर (जिन्हें समझना मुश्किल होता है)। ‘ऑप्टोसार’ तकनीक इन दोनों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है। यह बादलों, बारिश और अंधेरे के पार देख सकती है और साथ ही हाई-डेफिनिशन रंगीन तस्वीरें भी प्रदान करती है। इस हाइब्रिड तकनीक की वजह से अब किसी भी मौसम में पृथ्वी की सटीक निगरानी करना संभव हो गया है।

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