Haryana Weather Update: हरियाणा में मौसम ने फिर बदली करवट, चार जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी

Haryana News: हरियाणा के विभिन्न जिलों में बुधवार शाम को मौसम के मिजाज में अचानक आए बदलाव ने गर्मी से राहत दी है। कुरुक्षेत्र में जहां हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई, वहीं करनाल में देर रात तेज हवाओं के साथ जोरदार वर्षा हुई। जींद और कैथल के इलाकों में भी धूल भरी आंधी चलने से जनजीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वीरवार को भी प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में वर्षा का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है, जिससे आगामी कुछ घंटों में फिर से मेघ बरसने की संभावना प्रबल हो गई है।

सिरसा और हिसार समेत इन जिलों में यलो अलर्ट जारी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी जिलों के लिए विशेष तौर पर यलो अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 मई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम धीरे-धीरे साफ हो जाएगा। इस बीच तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा, जिससे कहीं धूप की तपिश तो कहीं ठंडी हवाओं का अहसास होगा। हालिया वर्षा के कारण रात के तापमान में पहले ही उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।

रोहतक में न्यूनतम पारा गिरा, हिसार में खिली तेज धूप

लगातार हो रही मौसमी हलचल के कारण रोहतक में न्यूनतम तापमान गिरकर 15.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी कम है। दूसरी ओर, बुधवार को हिसार और इसके आसपास के जिलों में दिनभर तेज धूप खिली रही, जिससे अधिकतम तापमान में उछाल आया और यह 34 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में दिन के तापमान में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे गर्मी का प्रभाव बढ़ेगा। हालांकि, रातें फिलहाल सामान्य से ठंडी बनी रहेंगी।

11 मई से फिर सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई तक मौसम साफ रहने के बाद 11 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है। इस नए सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश में एक बार फिर वर्षा और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के इस पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए अपनी कटी हुई फसलों और अनाज के भंडारण का उचित प्रबंध करें। मई के महीने में बार-बार हो रहे इस बदलाव ने पर्यावरण विशेषज्ञों को भी बदलते जलवायु पैटर्न पर चर्चा करने पर मजबूर कर दिया है।

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