Haryana News: विदेश में मोटी कमाई और वर्क परमिट का सपना दिखाकर मासूम लोगों को ठगने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ हरियाणा सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारी कर ली है। सरकार ने ट्रैवल एजेंटों से जुड़े पुराने नियमों में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए नया कानून ‘हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स (संशोधन) एक्ट 2026’ लागू कर दिया है। इस कानून के तहत अब कोई भी एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने या रोजगार के नाम पर भर्ती करने का दावा नहीं कर सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे दावों पर अब सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
अब केवल टूर और ट्रेवल तक सीमित रहेगी एजेंटों की भूमिका
नए कानून के लागू होने के बाद ट्रैवल एजेंटों का कार्यक्षेत्र बेहद सीमित कर दिया गया है। अब एजेंट केवल हवाई टिकट बुक करने, टूर पैकेज बेचने और यात्रा संबंधी अन्य व्यवस्थाएं करने तक ही अधिकृत होंगे। विदेश में रोजगार और भर्ती से जुड़े सभी मामलों को अब केवल केंद्र सरकार के ‘उत्प्रवास अधिनियम, 1983’ के तहत ही नियंत्रित किया जाएगा। यह कदम राज्य में पिछले कुछ वर्षों में बढ़े फर्जी वीजा, मानव तस्करी और करोड़ों की ठगी के मामलों को देखते हुए उठाया गया है, जिससे अवैध ‘डंकी’ रूटों पर भी लगाम लगेगी।
सजा के कड़े प्रावधान: 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना
हरियाणा सरकार ने इस संशोधित कानून में सजा के बेहद सख्त प्रावधान किए हैं। यदि कोई एजेंट नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा करता है या जाली दस्तावेज तैयार करता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की जेल काटनी होगी। साथ ही, 2 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन काम करने वाले एजेंटों को भी 2 से 7 साल तक की कैद हो सकती है। कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दोषी एजेंट की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है।
लोकपाल सिस्टम: अब पीड़ितों को नहीं काटने होंगे थानों के चक्कर
आम जनता की सुविधा के लिए इस कानून में एक ‘लोकपाल सिस्टम’ की नई व्यवस्था की गई है। अब विदेश भेजने के नाम पर ठगी का शिकार हुए व्यक्ति को सीधा पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं होगी। पीड़ित अपनी शिकायत सीधे लोकपाल के पास दर्ज करा सकेगा, जहां मामले की त्वरित सुनवाई की जाएगी। यदि लोकपाल को मामला गंभीर लगता है, तभी उसे पुलिस को सौंपा जाएगा। इस व्यवस्था से शिकायतों का निपटारा तेजी से होगा और लोगों को अदालती कार्यवाही के लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी।
केंद्र और राज्य के कानूनों के बीच टकराव को किया गया खत्म
पूर्व में बने राज्य कानून पर केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने क्षेत्राधिकार को लेकर कुछ आपत्तियां जताई थीं। नए संशोधन के बाद अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि विदेश रोजगार और उत्प्रवास के मामलों में केंद्र का कानून ही सर्वोपरि होगा। यदि किसी बिंदु पर राज्य और केंद्र के कानूनों के बीच विरोधाभास होता है, तो केंद्र के प्रावधान ही प्रभावी माने जाएंगे। इस स्पष्टता से अब कानूनी पेचीदगियां खत्म होंगी और फर्जी एजेंटों के खिलाफ कार्यवाही करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए आसान हो जाएगा।


