किन्नौर अग्निकांड: काशंग जलविद्युत परियोजना के लेबर कैंप में लगी भीषण आग, दो मजदूरों की जिंदा जलकर मौत

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मंगलवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। जिले के सुदूर पांगी गांव में स्थित काशंग जलविद्युत परियोजना के लेबर कैंप में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक अग्निकांड में सो रहे दो मजदूर जिंदा जल गए, जबकि एक अन्य मजदूर ने भागकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और अफरा-तफरी का माहौल है। अग्निशमन विभाग और परियोजना कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

देर रात गहरी नींद में हुआ हादसा

पूह-काजा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस परियोजना में मजदूरों के रहने के लिए लोहे के शेड बनाए गए हैं। मंगलवार रात करीब एक बजे जब करीब 35 मजदूर सो रहे थे, तभी अचानक एक शेड में आग भड़क उठी। मृतक मजदूरों की पहचान उत्तराखंड निवासी रणजीत कुमार और नेपाल निवासी जगत वारे रुकाया के रूप में हुई है। तीसरा मजदूर सरवन किसी तरह शेड से बाहर निकलने में सफल रहा। समय पर कार्रवाई से पास खड़े वाहनों और अन्य शेड को बचा लिया गया।

शॉर्ट सर्किट या लापरवाही हो सकती है कारण

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शेड के अंदर प्लाईबोर्ड लगा होने के कारण आग तेजी से फैली। आशंका जताई जा रही है कि यह हादसा बिजली के शॉर्ट सर्किट या जलती हुई बीड़ी-सिगरेट की वजह से हुआ होगा। हादसे की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की विशेष टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। टीम ने वहां से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

प्रशासन और पुलिस ने शुरू की जांच

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य का जायजा लिया। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारी अब यह भी जांच रहे हैं कि क्या लेबर कैंप में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन किया गया था। इस भीषण अग्निकांड ने परियोजना स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन मृतकों के परिजनों को सहायता देने की प्रक्रिया में जुटा है।

बड़ा हादसा होने से टला

किन्नौर के इस लेबर कैंप में कुल 35 मजदूर मौजूद थे। अग्निशमन विभाग ने बहुत सक्रियता दिखाते हुए आग को अन्य शेडों तक फैलने से रोक लिया। घटनास्थल के पास कई महंगी मशीनरी और वाहन खड़े थे, जिन्हें समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। अगर आग विकराल रूप लेकर अन्य शेडों को अपनी चपेट में ले लेती, तो जनहानि का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था। स्थानीय ग्रामीण और पुलिस अब विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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