Himachal News: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सरदार पटेल विश्वविद्यालय इकाई ने छात्र हितों को लेकर बिगुल फूंक दिया है। परिषद ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसमें विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के भविष्य से जुड़ी प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है। परिषद ने स्पष्ट किया कि वह हमेशा छात्र हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाना है।
भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग
ज्ञापन में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा विश्वविद्यालय की भूमि हस्तांतरण का है। परिषद ने राज्यपाल से मांग की है कि इस कानूनी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। भूमि संबंधी देरी के कारण संस्थान के कई विकास कार्य और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। परिषद का मानना है कि जमीन मिलने के बाद ही विश्वविद्यालय के विस्तार और नए भवनों के निर्माण का रास्ता साफ हो पाएगा।
स्थायी नियुक्तियों और नए पाठ्यक्रमों पर ध्यान
शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी परिषद ने अपनी चिंता व्यक्त की है। ज्ञापन में विश्वविद्यालय में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया है। वर्तमान में स्टाफ की कमी शैक्षणिक कार्यों में बाधा बन रही है। इसके साथ ही परिषद ने आधुनिक समय की जरूरतों को देखते हुए नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की वकालत की है। इससे स्थानीय छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
चंबा और कांगड़ा के कॉलेजों को पुनः जोड़ने की अपील
परिषद ने क्षेत्रीय संतुलन और प्रशासनिक सुगमता के लिए एक और बड़ी मांग रखी है। ज्ञापन में चंबा और कांगड़ा जिले के सभी महाविद्यालयों को पुनः सरदार पटेल विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में लाने का आग्रह किया गया है। परिषद के अनुसार, इन जिलों के छात्रों के लिए मंडी स्थित विश्वविद्यालय अधिक सुलभ है। इस भौगोलिक पुनर्गठन से हजारों छात्रों को प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी।
प्रशासन और सरकार को चेतावनी
विद्यार्थी परिषद ने अपनी मांगों के जरिए शासन और प्रशासन को एक मजबूत संदेश दिया है। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। छात्र संगठन का तर्क है कि स्थायी स्टाफ और नए विषयों के बिना किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता। अब सभी की निगाहें राजभवन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


