Delhi News: अगर आपके सपनों में जान हो, तो हर असफलता केवल एक नई तैयारी बन जाती है। दिल्ली के हर्ष दुबे ने इस बात को पूरी दुनिया के सामने सच साबित कर दिखाया है। हर्ष ने लगातार सात वर्षों तक कड़ी मेहनत की, कई परीक्षाएं दीं और अनगिनत इंटरव्यू का सामना किया। आखिरकार, अपने 14वें प्रयास में उन्होंने ‘एसएसबी’ (SSB) क्रैक कर भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) में अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। 20 जून 2025 का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया।
पिता के एक छोटे से सपने ने हर्ष के भीतर जगाई वर्दी की चाहत
हर्ष बताते हैं कि वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे, लेकिन उनके असली प्रेरणास्रोत उनके पिता बने। जब हर्ष सातवीं कक्षा में थे, तब उनके पिता ने एक बड़ी बात कही थी। पिता ने कहा था कि आज तक हमारे गांव से कोई भी व्यक्ति सरकारी अधिकारी नहीं बना है। तुम्हें यह इतिहास बदलना होगा। पिता के ये शब्द हर्ष के दिल में घर कर गए। आगे चलकर जब हर्ष ने एनसीसी (NCC) ज्वाइन की, तो उनका झुकाव भारतीय सशस्त्र बलों की ओर पूरी तरह से बढ़ गया।
असफलताओं की लंबी फेहरिस्त: 13 बार मिली करारी हार
हर्ष दुबे की सफलता की राह कांटों भरी थी और उनके संघर्ष की लिस्ट काफी लंबी है। उन्होंने सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं। हर्ष को 5 बार एनडीए (NDA) और 6 बार सीडीएस (CDS) परीक्षाओं में विफलता का स्वाद चखना पड़ा। इसके अलावा वे 6 बार एफकैट (AFCAT) और 1 बार सीजीकैट (CGCAT) में भी फेल हुए। उन्हें कई बार एसएसबी इंटरव्यू में ‘स्क्रीन आउट’ और ‘कॉन्फ्रेंस आउट’ होकर घर लौटना पड़ा।
12वीं के कम मार्क्स ने तोड़ा हौसला, फिर बीटेक में किया कमाल
हर्ष के मुताबिक, 12वीं कक्षा में कम अंक आने की वजह से एक समय उनका आत्मविश्वास पूरी तरह डगमगा गया था। उन्हें लगा कि शायद वे जीवन में कभी कुछ बड़ा नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने हार स्वीकार नहीं की और बीटेक (B.Tech) में दाखिला लिया। वहां उन्होंने 9.1 सीजीपीए (CGPA) जैसा शानदार स्कोर हासिल किया। इस शैक्षणिक सफलता ने उनके लिए टीजीसी, एसएससी (टेक) और नेवी टेक जैसी तकनीकी एंट्रियों के बंद पड़े दरवाजे फिर से खोल दिए।
50 हजार की सैलरी छोड़ी, सपनों के लिए कॉर्पोरेट वर्ल्ड को कहा अलविदा
बीटेक पूरा करने के बाद हर्ष ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में एक इंजीनियर के रूप में करियर शुरू किया। वहां उन्हें करीब 50 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिल रहा था, लेकिन उनका दिल वर्दी में बसता था। वे नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखते थे। कई बार इंटरव्यू के लिए उन्हें दफ्तर में झूठे बहाने बनाने पड़े। आखिरकार, जनवरी 2025 में उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी अच्छी-खासी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी ताकत लगा दी।
20 जून 2025: जब वर्दी पहनने का बरसों पुराना सपना हुआ साकार
नौकरी छोड़ने के बाद हर्ष के सामने कई आर्थिक और मानसिक चुनौतियां आईं, लेकिन उनका इरादा अटल था। 20 जून 2025 को जब इंडियन कोस्ट गार्ड एसएसबी के दौरान उनका चेस्ट नंबर पुकारा गया, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। हर्ष कहते हैं कि वर्षों का दर्द और लंबा इंतजार उस एक पल में मीठी सफलता में बदल गया। उनके इस जज्बे ने न केवल उनके पिता का मान बढ़ाया, बल्कि पूरे गांव का इतिहास भी बदल दिया।

