Delhi News: वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम अपनी पहली राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। बुधवार सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में उनका औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी अगवानी की। राष्ट्रपति लाम की यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक रिश्तों को नई दिशा देगी। दोनों देशों के शीर्ष नेता अब हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे।
महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि और द्विपक्षीय वार्ता का आगाज
राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद राष्ट्रपति तो लाम सीधे राजघाट पहुंचे। वहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद हाउस में उनके साथ उच्चस्तरीय बैठक शुरू की। इस वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। दोनों नेता पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 गौरवशाली वर्ष
भारत और वियतनाम इस साल अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे कर रहे हैं। यह मील का पत्थर दोनों देशों के मजबूत होते रक्षा और आर्थिक संबंधों का प्रतीक है। राष्ट्रपति लाम का यह दौरा इस ऐतिहासिक अवसर को और भी खास बना रहा है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए समझौतों पर मुहर लग सकती है। यह साझेदारी दक्षिण-पूर्वी एशिया में स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बोधगया से मुंबई तक का खास सफर
वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का शुभारंभ आध्यात्मिक नगरी बिहार के बोधगया से हुआ। राष्ट्रपति लाम ने महाबोधि मंदिर में विशेष प्रार्थना की और शांति का संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर वे 5 से 7 मई तक भारत के राजकीय प्रवास पर रहेंगे। उनके साथ वियतनाम सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया है। दिल्ली के कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति लाम आर्थिक राजधानी मुंबई का भी दौरा करेंगे।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन
हैदराबाद हाउस में हो रही चर्चा में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लाम रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियों पर मंथन कर रहे हैं। इस यात्रा से न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की स्थिति और सुदृढ़ होगी। सभी की निगाहें अब होने वाले साझा समझौतों पर टिकी हैं।

