Mexico City News: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने मेक्सिको सिटी को लेकर एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। सैटेलाइट से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह विशाल शहर हर साल लगभग 10 इंच (25 सेंटीमीटर) की दर से जमीन में धंस रहा है। नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के संयुक्त प्रोजेक्ट ‘निसार’ (NISAR) ने इस खतरनाक बदलाव को रिकॉर्ड किया है। यह दुनिया के सबसे तेजी से धंसने वाले बड़े शहरों में शामिल हो गया है।
प्राचीन झील पर बसा है 2.2 करोड़ की आबादी वाला शहर
मेक्सिको की राजधानी और उसके आसपास के इलाके एक प्राचीन झील के तल पर बसे हुए हैं। करीब 3,000 वर्ग मील में फैले इस क्षेत्र में 2.2 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जमीन के नीचे से लगातार पानी निकालने (Groundwater Extraction) और भारी शहरीकरण के कारण जमीन खोखली हो रही है। इसी वजह से मिट्टी सिकुड़ रही है और पूरा शहर धीरे-धीरे पाताल की ओर जा रहा है।
ऐतिहासिक इमारतों और बुनियादी ढांचे को बड़ा खतरा
जमीन धंसने का असर अब शहर की प्रतिष्ठित इमारतों पर साफ दिखने लगा है। मेक्सिको सिटी का प्रसिद्ध ‘मेट्रोपॉलिटन कैथेड्रल’ अब एक तरफ झुक गया है। ‘एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस’ स्मारक की ऊंचाई के साथ तालमेल बिठाने के लिए अब तक 14 अतिरिक्त सीढ़ियां जोड़ी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति शहर के सबवे सिस्टम, ड्रेनेज नेटवर्क और पेयजल आपूर्ति लाइनों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है, जिससे भविष्य में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
निसार सैटेलाइट ने अंतरिक्ष से पकड़ी पल-पल की हरकत
इस संकट की गहराई को मापने में भारत और अमेरिका का साझा ‘निसार’ मिशन अहम भूमिका निभा रहा है। नासा के वैज्ञानिक पॉल रोजेन के मुताबिक, यह सैटेलाइट रडार इमेजिंग के जरिए जमीन में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को भी पकड़ लेता है। अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि शहर के कुछ हिस्से हर महीने आधे इंच से ज्यादा धंस रहे हैं। यह तकनीक भविष्य में बड़ी आपदाओं को रोकने में मददगार हो सकती है।
जल संकट और जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता
मेक्सिको सिटी में पानी की भारी किल्लत है और जलवायु परिवर्तन के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। बारिश कम होने से जमीन के नीचे के जलभृत (Aquifers) फिर से नहीं भर पा रहे हैं। नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मेक्सिको के शोधकर्ता एनरिक कैबरल ने इसे एक ‘बड़ी समस्या’ करार दिया है। पिछले 100 वर्षों में शहर के कुछ हिस्से लगभग 40 फीट तक नीचे जा चुके हैं। सरकार अब इस डेटा के आधार पर दीर्घकालिक समाधान खोजने की कोशिश कर रही है।

