Health News: उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं। पचास साल की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मां हमेशा परिवार की देखभाल करती हैं और अपनी सेहत नजरअंदाज कर देती हैं। मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए उम्र के इस खास पड़ाव पर शरीर की नियमित जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है।
हार्ट चेकअप और बोन डेंसिटी टेस्ट
पचास की उम्र के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है। इसलिए ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी टेस्ट नियमित रूप से करवाएं। इसके अलावा उम्र के साथ महिलाओं की हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं। हड्डियों का घनत्व कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का खतरा बढ़ता है। हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए डेक्सा (DEXA) स्कैन बहुत फायदेमंद और जरूरी टेस्ट होता है।
ब्लड शुगर की नियमित जांच
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में डायबिटीज यानी मधुमेह का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। महिलाओं को अपनी जीवनशैली और खानपान का खास ख्याल रखना चाहिए। खून में शुगर की मात्रा जांचने के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा पिछले तीन महीने का औसत शुगर लेवल जानने के लिए एचबीएवनसी (HbA1c) टेस्ट बहुत जरूरी है। इन जांचों के जरिए आप समय रहते डायबिटीज की बीमारी को नियंत्रित कर सकते हैं और पूरी तरह स्वस्थ रह सकते हैं।
कैंसर स्क्रीनिंग बहुत है जरूरी
बढ़ती उम्र में महिलाओं को कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का खतरा अधिक रहता है। पचास वर्ष की आयु के बाद ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामले ज्यादा सामने आते हैं। इन बीमारियों का समय रहते पता लगाना बहुत आवश्यक है। ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए हर साल मैमोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिए। इसी तरह सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए पैप स्मीयर टेस्ट मौजूद है। इन जांचों से शुरुआती स्तर पर ही गंभीर बीमारी पकड़ी जाती है।
थायरॉइड और विटामिन की जांच
महिलाओं में थायरॉइड ग्रंथि का असंतुलन एक बहुत ही आम समस्या है। इससे अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना और हमेशा थकान महसूस होने जैसी दिक्कतें आती हैं। इसके लिए ब्लड टेस्ट के जरिए थायरॉइड की जांच जरूर करवाएं। बढ़ती उम्र में शरीर में विटामिन डी और विटामिन बी-12 की कमी भी तेजी से होती है। इन विटामिन्स की कमी से नसों और हड्डियों में तेज दर्द रहता है। डॉक्टर की सलाह पर ये सभी मेडिकल टेस्ट नियमित रूप से करवाएं।

