Tamil Nadu News: तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता के सिंहासन के लिए रस्साकशी तेज हो गई है। तमिल सुपरस्टार और टीवीके नेता विजय अपनी पहली सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े के बेहद करीब हैं, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। बुधवार रात तक विजय के पास 113 विधायकों का समर्थन था, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों की आवश्यकता है। विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतने वाली उनकी पार्टी को फिलहाल कांग्रेस के पांच विधायकों का साथ मिला है।
बहुमत का गणित और राजभवन की शर्त
विजय ने बुधवार को राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। उन्होंने राज्यपाल को 113 समर्थकों की सूची सौंपी, लेकिन राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से 118 विधायकों के समर्थन पत्र की मांग की है। 234 सीटों वाली विधानसभा में टीवीके ने भले ही 108 सीटें जीती हों, लेकिन विजय के दो सीटों से निर्वाचित होने के कारण एक सीट छोड़ने पर उनकी प्रभावी सदस्य संख्या 107 ही रह जाएगी।
गठबंधन की राह में खड़े हुए रोड़े
थलापति विजय के लिए बहुमत जुटाना तब और मुश्किल हो गया जब डीएमके गठबंधन के सहयोगियों ने उनसे दूरी बना ली। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और कम्युनिस्ट पार्टियों ने टीवीके को समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया है। इस राजनीतिक अनिश्चितता के चलते 7 मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह टलने के आसार बढ़ गए हैं। राज्यपाल की शर्तों के बाद विजय ने समर्थन जुटाने के लिए राजभवन से कुछ अतिरिक्त समय मांगा है।
अन्ना डीएमके में बगावत के संकेत
इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्ना डीएमके के 47 विधायकों के बीच अंदरूनी मतभेद उभर आए हैं। खबरें हैं कि सीवी षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायक विजय की सरकार का समर्थन करना चाहते हैं। इतना ही नहीं, पीएमके के चार विधायकों के भी विजय के संपर्क में होने की सूचना है। विजय कई अन्य छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं।
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की हुई शुरुआत
विधायकों की खरीद-फरोख्त और टूट-फूट के डर से टीवीके ने ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ का सहारा लिया है। पार्टी ने अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को महाबलीपुरम के चेंगलपट्टू स्थित ‘फोर पॉइंट्स रिसॉर्ट’ में शिफ्ट कर दिया है। कड़े सुरक्षा पहरे के बीच यहां विधायकों की बाड़ेबंदी की गई है। विजय के रणनीतिकार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं ताकि बहुमत परीक्षण से पहले विपक्षी दल उनके खेमे में सेंधमारी न कर सकें।

