बंगाल में ममता सरकार का ‘द ग्रेट एग्जिट’: हार के बाद टॉप सलाहकारों और अफसरों ने छोड़ा साथ, नबन्ना में सन्नाटा

West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद अब उनके ‘कोर ग्रुप’ में भगदड़ मच गई है। मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद नौकरशाहों, आर्थिक रणनीतिकारों और कानूनी सलाहकारों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में सन्नाटा पसरा है और एक दशक से पर्दे के पीछे से सत्ता चलाने वाला इकोसिस्टम पूरी तरह बिखर चुका है।

अलापन बंद्योपाध्याय और एच.के. द्विवेदी का चौंकाने वाला इस्तीफा

ममता बनर्जी के सबसे वफादार माने जाने वाले दो पूर्व मुख्य सचिवों ने अपने पदों को अलविदा कह दिया है। मुख्य सलाहकार अलापन बंद्योपाध्याय और एच.के. द्विवेदी ने मंगलवार को अपने इस्तीफे सौंप दिए। अलापन बंद्योपाध्याय वही अधिकारी हैं, जिनके लिए ममता बनर्जी ने 2021 में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से सीधा मोर्चा लिया था। उन्हें ममता की प्रशासनिक ‘आंख और कान’ माना जाता था। इन वरिष्ठ अधिकारियों का जाना टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा प्रशासनिक झटका है।

आर्थिक और कानूनी मोर्चे पर भी बिखराव

राज्य की आर्थिक नीतियों के मुख्य वास्तुकार और अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) के अध्यक्ष पद से हटते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी बताया। वहीं, कानूनी मोर्चे पर सरकार का बचाव करने वाले एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी पद छोड़ दिया है। किशोर दत्ता शिक्षक भर्ती घोटाला और चुनावी हिंसा जैसे गंभीर मामलों में सरकार के मुख्य सिपाही थे। अब ये सभी अनुभवी चेहरे मैदान से बाहर हो चुके हैं।

नैरेटिव सेट करने वाली मीडिया टीम ने भी मोड़ा मुंह

ममता बनर्जी के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर ढाल बनने वाली टीम भी अब गायब हो गई है। विभिन्न अकादमियों और निगमों में तैनात कई वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया सलाहकारों ने अपने पदों से किनारा कर लिया है। ये वे लोग थे जो सरकार के पक्ष में नैरेटिव सेट करते थे। सत्ता परिवर्तन की आहट पाते ही इस पूरे समर्थन तंत्र का ढहना यह बताता है कि आने वाले समय में ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह और भी चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

हार के बावजूद ममता के तेवर बरकरार

भले ही उनके पुराने सिपहसालार साथ छोड़ रहे हों, लेकिन ममता बनर्जी हार मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने के बावजूद चुनाव में “धांधली” का आरोप लगाया है। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने फिलहाल औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से तत्काल इस्तीफा देने के संकेत नहीं दिए हैं। हालांकि, सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि कई प्रभावशाली आईएएस और आईपीएस अधिकारी अब बीजेपी के नेतृत्व वाली नई सरकार के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं।

बंगाल में 15 साल के टीएमसी शासन का अंत

हालिया चुनावी नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बंगाल में ऐतिहासिक और प्रचंड बहुमत हासिल किया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटों पर कब्जा जमाया है। इस शानदार जीत के साथ ही बंगाल में टीएमसी का लगातार 15 वर्षों से चला आ रहा शासन समाप्त हो गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार इन महत्वपूर्ण रिक्त पदों पर किन्हें नियुक्त करती है और प्रशासनिक ढांचे में क्या बदलाव लाती है।

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