हिमाचल पंचायत चुनाव 2026: निर्वाचन आयोग ने जारी की उम्मीदवारों के लिए नई गाइडलाइंस, जानें नामांकन की शर्तें और जमानत राशि

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनावों का बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए विस्तृत नियमावली जारी कर दी है। अब प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य पद के उम्मीदवारों को नामांकन के समय अनुबंध-एक के तहत शपथ पत्र जमा करना होगा। इस घोषणा पत्र का राजपत्रित अधिकारी से सत्यापन अनिवार्य है। आयोग ने चेतावनी दी है कि गलत जानकारी देने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द किया जा सकता है।

शपथ पत्र का सत्यापन और कानूनी कार्रवाई के प्रावधान

पंचायत समिति और जिला परिषद के प्रत्याशियों को अपना शपथ पत्र दंडाधिकारी या शपथ आयुक्त से प्रमाणित करवाना होगा। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उम्मीदवार के दस्तावेजों में विसंगति पाई गई, तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित किया जाएगा। यह नियम चुनाव जीतने के बाद भी लागू रहेगा। नियमों की सख्ती का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सभी उम्मीदवारों को अपने दस्तावेजों की सत्यता की स्वयं जिम्मेदारी लेनी होगी।

विभिन्न पदों के लिए निर्धारित जमानत राशि का विवरण

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज नियम, 1994 के अनुसार पदों के आधार पर जमानत राशि तय की गई है। ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए सामान्य श्रेणी को 100 रुपये और आरक्षित श्रेणी व महिलाओं को 50 रुपये देने होंगे। वहीं प्रधान, उपप्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के लिए सामान्य श्रेणी हेतु 150 रुपये जबकि आरक्षित वर्ग के लिए 75 रुपये निर्धारित हैं। जिला परिषद के उम्मीदवारों को क्रमशः 200 और 100 रुपये की राशि जमा करवानी होगी।

जमानत राशि की वापसी और ‘जब्ती’ के कड़े नियम

चुनाव आयोग के अनुसार, नियत समय में नामांकन वापस लेने पर जमानत राशि लौटा दी जाएगी। सभी विजयी प्रत्याशियों को भी उनकी राशि वापस मिल जाएगी। हालांकि, पराजित उम्मीदवारों के लिए नियम थोड़े सख्त हैं। उन्हें कुल वैध मतों का कम से कम छठा हिस्सा (1/6 भाग) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि कोई प्रत्याशी न्यूनतम वोट हासिल करने में विफल रहता है, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी। जिला पंचायत अधिकारी ने सभी जिलों को दिशानिर्देश भेज दिए हैं।

पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में आयोग का बड़ा कदम

राज्य निर्वाचन आयोग का यह कदम ग्रामीण राजनीति में सुचिता लाने की एक बड़ी कोशिश है। राजपत्रित अधिकारियों और दंडाधिकारियों से सत्यापन करवाने की शर्त से फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। कांगड़ा के जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बताया कि विभाग ने नामांकन केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए समय रहते अपने शपथ पत्र तैयार करवा लें।

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