प्रयागराज: पॉक्सो मामले में न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने खुद को सुनवाई से किया अलग, जानें पूरा विवाद

Uttar Pradesh News: इलाहाबाद हाईकोर्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद से जुड़े पॉक्सो मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है। उनके इस फैसले ने अदालती गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब हाईकोर्ट प्रशासन इस विवाद की आगे की सुनवाई के लिए नई पीठ का गठन करेगा।

अवमानना याचिका में जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप

यह पूरा मामला शंकराचार्य और उनके शिष्य के खिलाफ दर्ज पॉक्सो केस से संबंधित है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट में एक अवमानना याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया है। इसमें अदालत के पूर्व निर्देशों और आदेशों के जानबूझकर उल्लंघन की बात भी कही गई है। इस कानूनी चुनौती ने मामले की जटिलता को काफी बढ़ा दिया है।

न्यायमूर्ति का सुनवाई से हटना और न्यायिक प्रक्रिया

अवमानना याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मामले से हटने का निर्णय लिया। हालांकि, न्यायाधीशों द्वारा स्वयं को अलग करने (Recusal) के पीछे कई कानूनी और व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं। इस कदम के बाद अब मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेजा जाएगा। न्यायिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए न्यायाधीश अक्सर ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर के गंभीर आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यह कानूनी लड़ाई काफी समय से चल रही है। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने गंभीर आरोप लगाते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। पुलिस जांच और निचली अदालतों के फैसलों के बाद यह मामला अब उच्च न्यायालय की दहलीज पर है। अवमानना याचिका के माध्यम से अब यह सुनिश्चित करने की कोशिश हो रही है कि अदालती आदेशों का पालन सख्ती से किया जाए।

नई पीठ के गठन पर टिकी सभी पक्षों की नजरें

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल के अलग होने के बाद अब हाईकोर्ट प्रशासन नई पीठ तय करेगा। इस बदलाव के कारण अगली सुनवाई की तारीख और न्यायिक प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष, दोनों ही अब नई पीठ के गठन का इंतजार कर रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अवमानना याचिका पर आने वाला फैसला इस पूरे पॉक्सो केस की दिशा बदल सकता है।

हाईकोर्ट में बढ़ी हलचल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

धार्मिक और कानूनी रूप से संवेदनशील होने के कारण हाईकोर्ट परिसर में इस मामले पर विशेष चर्चा हो रही है। शंकराचार्य जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व से जुड़ा होने के कारण मामले की रिपोर्टिंग भी काफी सतर्कता से की जा रही है। अदालत इस बात पर गौर कर रही है कि क्या वास्तव में जमानत के नियमों को ताक पर रखा गया। नई पीठ के समक्ष अब साक्ष्यों और अवमानना के बिंदुओं पर विस्तार से बहस होगी।

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