International News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक ऐतिहासिक 14-सूत्रीय शांति समझौते पर सहमति बन गई है। अल अरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों ने गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और इसे धीरे-धीरे फिर से खोलने का फैसला किया है। इस कूटनीतिक सफलता के बाद अब आने वाले कुछ घंटों में जलडमरूमध्य में फंसे दर्जनों जहाजों को सुरक्षित मुक्त करा लिया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा संकट होगा दूर
ईरान ने युद्ध की शुरुआत में ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था। इस कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और ऊर्जा की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी। समझौते के तहत, अमेरिका अब अपनी समुद्री नाकाबंदी में ढील देगा। इसके बदले में ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोल देगा। अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियस के अनुसार, दोनों पक्ष एक विस्तृत परमाणु वार्ता की रूपरेखा तैयार करने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद झुका ईरान
शांति वार्ता से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि यदि ईरान शर्तें नहीं मानता, तो उस पर पहले से कहीं अधिक तीव्रता के साथ बमबारी की जाएगी। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा था कि शर्तों को मानने की स्थिति में ही सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ रोका जाएगा। इस कड़े सैन्य दबाव के बाद ही ईरान अगले 48 घंटों में प्रमुख बिंदुओं पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देने के लिए राजी हुआ है।
परमाणु संवर्धन पर रोक और आर्थिक प्रतिबंधों में मिलेगी राहत
प्रस्तावित शांति समझौते के मुख्य बिंदुओं में परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोकने के लिए तैयार हो गया है। इसके जवाब में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटा लेगा। साथ ही, तेहरान को उसके फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड के इस्तेमाल की अनुमति भी दी जाएगी। यह कदम ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित हो सकता है और क्षेत्र में स्थिरता लाएगा।
ट्रंप के चीन दौरे से पहले ईरानी विदेश मंत्री का बीजिंग दौरा
इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची बीजिंग पहुंच गए हैं। अराघची का यह दौरा डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित चीन यात्रा से ठीक पहले हो रहा है। बीजिंग में इस मुलाकात को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियां इस मुलाकात पर नजरें जमाए हुए हैं। ईरान चाहता है कि किसी भी बड़े वैश्विक समझौते से पहले वह अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर ले।
शांति की ओर बढ़ते कदम: भविष्य की बड़ी चुनौतियां
भले ही दोनों पक्ष समझौते के करीब हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अभी अंतिम हस्ताक्षर होने बाकी हैं। हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच इतनी गंभीर बातचीत हुई है। इस शांति समझौते का सफल होना न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। सभी की निगाहें अब अगले 48 घंटों पर टिकी हैं।

