ऑपरेशन सिंदूर का असर: पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था और गहरे संकट में, विदेशी निवेशकों ने भी मोड़ा मुंह

Pakistan News: भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया है। ग्रीस के प्रतिष्ठित मीडिया हाउस ‘ग्रीस सिटी टाइम्स’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में पाकिस्तान का आर्थिक संकट काफी गहरा गया है। मई 2025 में हुए इस सैन्य प्रहार के बाद अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा गया है। पर्यटन, विमानन और सैन्य निर्यात जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर अब भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, जिससे उबरना फिलहाल नामुमकिन दिख रहा है।

विदेशी निवेशकों का टूटा भरोसा और बढ़ती महंगाई

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सैन्य अभियान ने पाकिस्तान में महंगाई की आग को और हवा दी है। विकास की धीमी गति और अनिश्चित सुरक्षा हालातों ने विदेशी पूंजी निवेश को ठप कर दिया है। पहले से ही भारी कर्ज के बोझ और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रही इस्लामाबाद सरकार के लिए यह बड़ा झटका है। निवेशकों ने ‘प्रतीक्षा करो और देखो’ की नीति अपना ली है, जिससे भविष्य की वित्तीय योजनाओं पर काले बादल मंडरा रहे हैं।

स्थिर जीडीपी और गिरती क्रय शक्ति ने बढ़ाई चिंता

पाकिस्तान में पिछले तीन वर्षों से जीडीपी विकास दर औसतन 3 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। यह आंकड़ा कमजोर औद्योगिक गति और सुस्त निवेश की कड़वी हकीकत को बयां करता है। राजकोषीय घाटे और उच्च ऋण-सेवा लागतों के कारण आम परिवारों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) लगातार गिर रही है। साल 2025 में देश को राजकोषीय असंतुलन का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप अब बुनियादी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और आम जनता त्रस्त है।

पर्यटन और विमानन क्षेत्र को लगा सबसे बड़ा झटका

सैन्य अभियान के कारण पाकिस्तान के पर्यटन उद्योग को सर्वाधिक क्षति पहुंची है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों द्वारा बड़े पैमाने पर बुकिंग रद्द करने से होटलों और टूर ऑपरेटरों की कमर टूट गई है। पहले से ही घाटे में चल रहा विमानन क्षेत्र भी ऑपरेशन सिंदूर की चपेट में आ गया है। हवाई संपर्कों में बाधा और सुरक्षा चिंताओं के कारण न केवल एयरलाइंस बल्कि निर्यातकों के लिए भी माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ गई है, जिससे पूरा क्षेत्र संकट में है।

निर्यात बाजार में भारत और वियतनाम ने बनाई बढ़त

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के व्यापारिक विश्वास में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने अब पाकिस्तान के बजाय भारत, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे स्थिर बाजारों की ओर रुख कर लिया है। खासतौर पर कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग सामानों के समय-संवेदनशील निर्यात में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है। माल की आपूर्ति में देरी और बढ़ती लागत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तानी उत्पादों की साख को काफी कमजोर कर दिया है।

भविष्य का अनुमान: और भी भयावह होगी महंगाई

आने वाले वर्षों के लिए रिपोर्ट में बेहद डरावने अनुमान लगाए गए हैं। पाकिस्तान में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति, जो 2025 में 4.5 प्रतिशत थी, उसके 2026 में 7.2 प्रतिशत और 2027 तक 8.4 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है। मुद्रास्फीति का यह दबाव अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित होगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कड़े आर्थिक सुधार नहीं किए गए, तो पाकिस्तान के लिए अपने बाहरी वित्तपोषण दायित्वों को पूरा करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

Hot this week

Related News

Popular Categories