दिल्ली में काशी जैसा कायाकल्प: यमुना के 30 ऐतिहासिक घाटों से हटेगी सदियों पुरानी बसावट, पंडा परिवारों में मची खलबली

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में यमुना किनारों को काशी के गंगा घाटों की तर्ज पर भव्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार ने यमुना बाजार स्थित 30 ऐतिहासिक पक्के घाटों के कायाकल्प के लिए अभियान तेज कर दिया है। जिला प्रशासन ने इन घाटों पर पीढ़ियों से रह रहे पंडों (तीर्थ पुरोहितों) को 15 दिनों के भीतर अपनी बसावट खाली करने का कड़ा नोटिस जारी किया है। सरकार का उद्देश्य इन घाटों को दिव्य और पर्यटन के अनुकूल बनाना है।

पांडव कालीन विरासत पर संकट? पंडा परिवारों की बढ़ी चिंता

प्रशासन के इस फैसले से दशकों से यमुना किनारे रह रहे करीब 60 पंडा परिवारों की चिंताएं गहरा गई हैं। इन तीर्थ पुरोहितों का दावा है कि ये घाट पांडव कालीन हैं और वे यहां छह से सात पीढ़ियों से रह रहे हैं। हालांकि ऐतिहासिक उल्लेख इन्हें 100 वर्ष से थोड़ा अधिक पुराना बताते हैं। पंडा परिवारों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें घाट से 300 मीटर के दायरे में ही बसाया जाए। वे आजीविका और धार्मिक आस्था का हवाला देकर पुनर्वास की गुहार लगा रहे हैं।

पुनर्विकास बनाम पुनर्वास: हाईकोर्ट के पुराने आदेश का मुद्दा

पंडा सुरेश चंद शर्मा का कहना है कि उन्हें विकास से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को हाईकोर्ट के पुराने आदेश का पालन करना चाहिए। गौरतलब है कि साल 2006 में भी डीडीए ने इन घाटों को खाली कराने की कोशिश की थी। तब मामला अदालत पहुंचा था और कोर्ट ने पुरोहितों को 300 मीटर के दायरे में जगह देने का आदेश दिया था। पंडे उर्मिला शर्मा के अनुसार, 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी उस निर्णय पर अमल नहीं हुआ है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यमुना प्रेम और वासुदेव घाट का मॉडल

दिल्ली में भाजपा सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की है। पदभार संभालते ही उन्होंने यमुना आरती कर विकास का संकल्प लिया था। पूर्व राज्यपाल वीके सक्सेना के कार्यकाल में कुदेशिया घाट को ‘वासुदेव घाट’ जैसा भव्य रूप दिया गया था। अब इसी तर्ज पर यमुना बाजार के 30 घाटों को संवारा जाएगा। सरकार वहां भक्तों के लिए सुविधाएं, हरियाली और स्वच्छ वातावरण विकसित करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है।

मंदिरों और यज्ञशालाओं को हटाने पर छिड़ा नया विवाद

यमुना के इन घाटों पर 50 से अधिक प्राचीन मंदिर और यज्ञशालाएं स्थित हैं। नोटिस जारी होने के बाद इनकी सुरक्षा को लेकर संशय पैदा हो गया है। जिला प्रशासन ने फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट नीति साझा नहीं की है। हालांकि, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के दौरान भी मंदिरों को शिफ्ट करने पर भारी विवाद हुआ था। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे ताकि लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

डीडीएमए नोटिस की वैधानिकता पर स्थानीय निवासियों का सवाल

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने ‘ओ जोन’ में स्थित इस बसावट को बाढ़ प्रभावित बताते हुए अवैध निर्माण करार दिया है। नोटिस में कहा गया है कि जान-माल की हानि को रोकने के लिए 15 दिन में जगह खाली कर दें। वहीं, स्थानीय निवासी नितिन शर्मा ने डीडीएमए कानून के तहत घर गिराने के प्रावधान पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, यह नोटिस कानून सम्मत नहीं है। फिलहाल पंडा समुदाय अपनी सात पीढ़ियों की विरासत बचाने के लिए कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है।

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