Madhya Pradesh News: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक गढ़ में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव में गुना से जीत दर्ज करने के बाद सिंधिया का रसूख बढ़ा था, लेकिन अब उनके धुर विरोधी केपी यादव की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा आलाकमान पूर्व सांसद केपी यादव को एक महत्वपूर्ण निगम का अध्यक्ष बनाने की तैयारी में है। गृहमंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से यादव को बड़ी जिम्मेदारी देने का जो वादा किया था, पार्टी अब उसे पूरा करने जा रही है।
अमित शाह का वादा और केपी यादव की नई पारी
भाजपा के गलियारों में चर्चा है कि केपी यादव का नाम कॉर्पोरेशन अध्यक्ष के पद के लिए लगभग तय हो चुका है। गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान यादव के लिए जिस सम्मानजनक पद की घोषणा की थी, उस पर अब सहमति बन गई है। हालांकि आधिकारिक आदेश अभी लंबित है, लेकिन माना जा रहा है कि 11 निगम मंडलों और प्राधिकरणों की आगामी सूची में उनके नाम का ऐलान होगा। यह कदम सिंधिया और यादव के बीच के समीकरणों को फिर से दिलचस्प बना सकता है।
सिंधिया और यादव के बीच का रोचक चुनावी इतिहास
मामले का सबसे दिलचस्प पहलू केपी यादव और सिंधिया की पुरानी प्रतिद्वंद्विता है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव ने भाजपा के टिकट पर तत्कालीन कांग्रेसी प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर इतिहास रचा था। हालांकि, बाद में सिंधिया खुद भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी ने 2024 में यादव का टिकट काटकर सिंधिया को उम्मीदवार बनाया। अब पार्टी संगठन यादव को बड़ा पद देकर कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बिठाने की कोशिश कर रहा है।
नियुक्तियों का दौर शुरू और ग्वालियर-चंबल का समीकरण
मध्य प्रदेश में निगम मंडलों और आयोगों में नियुक्तियों का सिलसिला तेज हो चुका है। हाल ही में राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष पद पर केशव सिंह बघेल की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण में अशोक जादौन को अध्यक्ष और उदयवीर सिंह को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इन नियुक्तियों को आगामी विधानसभा उपचुनावों और क्षेत्रीय राजनीति को साधने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। सिंधिया समर्थकों और पुराने भाजपाइयों के बीच वर्चस्व की यह जंग अब नया मोड़ ले रही है।
20 नामों पर बनी सहमति और जल्द होगी आधिकारिक घोषणा
राज्य सरकार और संगठन के बीच हुई बैठकों के बाद करीब 20 नामों पर सहमति बन चुकी है। महिला आयोग और बाल आयोग के बाद अब अन्य महत्वपूर्ण प्राधिकरणों में नियुक्तियां होनी हैं। केपी यादव को बड़ी जिम्मेदारी मिलने से उनके समर्थकों में उत्साह है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केपी यादव की पदोन्नति से ग्वालियर-चंबल संभाग की राजनीति में सिंधिया के एकतरफा प्रभाव को संतुलित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे पार्टी के भीतर का आंतरिक लोकतंत्र और मजबूत होने की उम्मीद है।
