National News: भारत में प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। देश के प्रमुख शहरों और थोक मंडियों में प्याज के दाम 50 से 60 रुपये प्रति किलो के स्तर को छू रहे हैं। चंद हफ्तों पहले तक जो प्याज बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध था, उसके अचानक महंगे होने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने बिगाड़ा खेल
प्याज की कीमतों में इस भारी उछाल का सबसे बड़ा कारण मौसम की मार को माना जा रहा है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में तैयार खड़ी और कटी हुई प्याज खराब होने से मंडियों में नई आवक काफी घट गई है। सप्लाई चेन में आए इस अचानक अवरोध ने सीधे तौर पर खुदरा कीमतों को प्रभावित किया है।
स्टॉक में कमी और बढ़ता सप्लाई गैप
कोल्ड स्टोरेज में रखी पुरानी प्याज का स्टॉक अब धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर है। वहीं, नई खरीफ फसल अभी तक पूरी तरह से बाजार में नहीं उतरी है। इस बीच पैदा हुए सप्लाई गैप ने कीमतों पर दबाव और बढ़ा दिया है। कुछ व्यापारियों द्वारा अधिक मुनाफे के चक्कर में स्टॉक रोकने की खबरें भी आ रही हैं। इस कृत्रिम किल्लत (Artificial Shortage) की वजह से भी बाजार में प्याज की कीमतों को हवा मिल रही है।
महंगा ट्रांसपोर्ट और सरकार की राहत योजना
डीजल की कीमतों में स्थिरता न होने और ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से भी प्याज महंगा हुआ है। खेतों से मंडियों और फिर रिटेल दुकानों तक प्याज पहुँचाने का खर्च काफी बढ़ गया है। हालांकि, सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से सस्ती प्याज उपलब्ध कराने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
