Uttar Pradesh News: आजमगढ़ की एमपी-एमएलए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता कमला प्रसाद यादव को राहत दी है। अदालत ने उन्हें सात साल पुराने एक आपराधिक मामले में बाइज्जत बरी कर दिया है। साल 2017-18 के इस मुकदमे में सबूतों की भारी कमी पाई गई। अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
सबूतों के अभाव में केस हुआ खारिज
न्यायाधीश अनुपम कुमार त्रिपाठी ने इस महत्वपूर्ण मामले पर अंतिम फैसला सुनाया। यह मुकदमा साल 2019 से अदालत में विचाराधीन था। करीब सात साल तक इस मामले की सुनवाई चली। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना। अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास मिला। पुलिस कोई भी ऐसा ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी जिससे आरोप सिद्ध हो सकें। जज ने स्पष्ट किया कि संदेह का लाभ हमेशा आरोपी को मिलता है।
राजनीतिक द्वेष के कारण दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस ने कमला प्रसाद और अन्य पर दंगा करने और धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में बेहद मजबूती से अपना पक्ष रखा। वकील ने कोर्ट को बताया कि यह पूरा मामला केवल राजनीतिक दुश्मनी के कारण दर्ज कराया गया था। सुनवाई के दौरान पेश हुए आठ गवाहों की गवाही भी अदालत में टिक नहीं पाई।
न्यायपालिका पर जताया पूरा भरोसा और आभार
अदालत ने साक्ष्यों की कमी को अपना मुख्य आधार माना। कोर्ट ने पूर्व एमएलसी सहित अन्य छह लोगों को राहत दी। इनमें संजय यादव, गामा यादव, मनोज यादव, शंभू यादव और नागेंद्र यादव शामिल हैं। इन सभी को अदालत ने हर आरोप से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। फैसले के तुरंत बाद कचहरी परिसर में मौजूद तमाम समर्थकों ने भारी खुशी व्यक्त की। पूर्व एमएलसी कमला प्रसाद यादव ने न्यायपालिका पर अपना अटूट विश्वास जताया।
