मां की बीमारी और गरीबी को मात देकर सीतापुर की कशिश वर्मा ने यूपी बोर्ड मेरिट में पाया शीर्ष स्थान

Uttar Pradesh News: सीतापुर की बेटी कशिश वर्मा ने यूपी बोर्ड हाई स्कूल परीक्षा में राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक रैंक नहीं, बल्कि हर उस विद्यार्थी के लिए उम्मीद की किरण है जो तंगहाली के चलते हार मानने लगता है। बाबूराम सावित्री देवी स्कूल की इस छात्रा ने साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत के आगे परिस्थितियां भी घुटने टेक देती हैं। उसकी कामयाबी के पीछे अभाव और पारिवारिक चुनौतियों की एक लंबी कहानी छिपी है।

कभी हार नहीं मानी

कशिश वर्मा का जीवन कठिन संघर्षों से भरा रहा। उसने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कभी भी मजबूत नहीं रही। इसके बावजूद उसने पढ़ाई से अपना ध्यान नहीं हटाया। घर में पैसों की किल्लत आए दिन बनी रहती थी। लेकिन कशिश ने कभी अपने सपनों को इन परेशानियों की भेंट नहीं चढ़ने दिया। उसने कहा कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। यही सोच उसे आज इस मुकाम तक लेकर आई है।

मां की सेहत और घर की जिम्मेदारियां

कशिश की जीत की राह को और भी मुश्किल बनाने वाली एक बात उसकी मां की बिगड़ी सेहत थी। उसने बताया कि उसकी मां अक्सर बीमार रहती थीं। ऐसे में उसके ऊपर घर की जिम्मेदारियों का बोझ भी आ जाता था। पढ़ाई के लिए अलग से समय निकालना एक बड़ी चुनौती साबित होती थी। फिर भी, कशिश ने हिम्मत नहीं खोई। उसने हर दिन किताबों को वक्त दिया और रिवीजन पर अपनी पूरी ताकत लगा दी। संसाधनों की कमी कभी उसके रास्ते की दीवार नहीं बनी।

शिक्षकों और माता-पिता का आशीर्वाद

अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद कशिश ने अपनी भावनाएं साझा कीं। उसने बताया कि उसे इस उपलब्धि पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्कूल और परिजनों को दिया। उसने कहा कि यह मेरे स्कूल बाबूराम सावित्री देवी और माता-पिता के आशीर्वाद का ही नतीजा है। कशिश की आंखों में जीत की चमक थी तो साथ ही बीते संघर्षों की थोड़ी नमी भी साफ देखी जा सकती थी। उसका यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम प्रेरणादायक नहीं है।

पूरे सीतापुर का बढ़ाया मान

कशिश वर्मा ने अपनी मेहनत और लगन से पूरे सीतापुर जिले को गौरवान्वित किया है। उसने साबित कर दिया कि प्रतिभा पर किसी संसाधन या सुविधा का कोई बंधन नहीं होता। वह प्रतिकूल हालात में और भी निखरकर सामने आती है। उसकी कहानी अब हजारों छात्रों के लिए एक मिसाल बन गई है। जो बच्चे गरीबी और पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके पास अब कशिश का उदाहरण है। यह जीत दिखाती है कि सच्ची प्रतिभा कभी किसी की मोहताज नहीं होती।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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