बस्ती की बेटी साक्षी चौधरी ने यूपी बोर्ड की मेरिट सूची में आठवीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया

Uttar Pradesh News: बस्ती जिले के रुधौली की रहने वाली साक्षी चौधरी ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े संसाधनों के बाद भी मुश्किल लगता है। यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में उसने प्रदेश स्तर पर आठवां स्थान हासिल किया है। साक्षी ने न सिर्फ मेरिट में जगह बनाई, बल्कि पूरे बस्ती जिले में टॉप कर अपने क्षेत्र का मान भी बढ़ाया है। उसकी यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उसने अभावों के बीच रहकर अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया।

पिता के निधन के बाद मां ने संभाला मोर्चा

साक्षी चौधरी की जिंदगी में कुछ साल पहले एक बड़ा तूफान आया था। उसके पिता का निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन साक्षी की मां ने हिम्मत नहीं हारी। वह एक स्कूल में शिक्षामित्र के तौर पर काम करती हैं। पति के जाने के बाद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को कभी आर्थिक तंगी की भेंट नहीं चढ़ने दिया। बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उनकी आंखों में अपने त्याग की सार्थकता साफ झलक रही थी।

जिले की टॉप-10 सूची में स्कूल का दबदबा

साक्षी की इस शानदार सफलता ने उसके विद्यालय को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जिले की टॉप-10 मेरिट सूची में साक्षी के अलावा उसी स्कूल के तीन अन्य छात्रों ने भी अपनी जगह पक्की की है। इस प्रदर्शन ने ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के स्तर को लेकर बनी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। लोग अब मानने लगे हैं कि सही मार्गदर्शन मिले तो गांव के बच्चे भी बड़े शहरों के छात्रों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

सामूहिक प्रयास और अनुशासन की जीत

विद्यालय के प्रबंधक दीनानाथ चौधरी ने इस ऐतिहासिक पल को सामूहिक प्रयासों का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने हर छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान दिया। बच्चों की कमजोरियों पर खास काम किया गया। इसी मेहनत का नतीजा आज सबके सामने है। वहीं प्रधानाचार्य चंद्रभूषण पांडे ने इस उपलब्धि को अनुशासन की जीत करार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साक्षी जैसे छात्र समाज के लिए जीता-जागता उदाहरण हैं। यदि संकल्प मजबूत हो तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती।

आईएएस बनकर देश की सेवा का सपना

साक्षी चौधरी ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां और शिक्षकों को दिया है। उसने बताया कि मां ने कभी भी घर की आर्थिक परेशानियों को उसकी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने हर मुश्किल को अपने सीने से लगाकर बेटी का रास्ता साफ किया। साक्षी का सपना अब आईएएस अधिकारी बनने का है। वह अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। जिला विद्यालय निरीक्षक संजय कुमार सिंह ने कहा कि साक्षी ने अपनी लगन से पूरे बस्ती जिले का मान बढ़ाया है।

संघर्षरत छात्रों के लिए उम्मीद की किरण

साक्षी की यह सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है जो पैसों की कमी के कारण अपने सपनों को बीच रास्ते में ही छोड़ देते हैं। उसकी कहानी बताती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मेहनत और ईमानदारी का कोई विकल्प नहीं है। विद्यालय प्रबंधन ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों पर भरोसा बनाए रखें। उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहें। सही देखभाल और मार्गदर्शन ही किसी भी छात्र के सुनहरे भविष्य की असली चाबी है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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