कानपुर में नजूल की जमीन का महाघोटाला: CBCID दफ्तर वाली सरकारी जमीन 24 करोड़ में बेची, 3 NRI समेत 6 पर FIR

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में भू-माफियाओं के दुस्साहस का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सिविल लाइंस स्थित CBCID कार्यालय की सरकारी नजूल जमीन को जालसाजों ने 24.77 करोड़ रुपये में बेच डाला। इस खेल का खुलासा तब हुआ जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गोपनीय शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई। विक्रेताओं ने जमीन के नजूल होने के तथ्य छिपाकर एसए बिल्ड हाई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम बैनामा कर दिया था। प्रशासन ने अब इस जमीन पर पुन: कब्जा कर इसे फिर से नजूल घोषित कर दिया है।

अमेरिका में रह रहे तीन NRI भाइयों ने रची धोखाधड़ी की साजिश

जांच रिपोर्ट के आधार पर सदर तहसील के लेखपाल ने कोतवाली थाने में तीन एनआरआइ (NRI) समेत कुल छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। नामजद आरोपियों में अमेरिका के लास एंजिल्स में रह रहे नीरज बेरी, पेंसिल्वेनिया के विकास बेरी और पोटोलैंड की मनका शर्मा शामिल हैं। इनके साथ ही सिविल लाइंस निवासी तरंग बेरी, एसए बिल्ड हाई कंपनी और इसके डायरेक्टर अहमद ऐतिशाम पर भी धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

1982 में आवंटित पट्टे की आड़ में तथ्यों को छिपाकर किया गया खेल

जांच में खुलासा हुआ कि यह 4000 वर्ग मीटर भूमि वर्ष 1982 में पट्टे पर दी गई थी। पट्टाधारकों ने न तो लीज रेंट जमा किया और न ही जमीन को फ्रीहोल्ड कराया, इसके बावजूद 2012 में इसे अवैध रूप से बेच दिया गया। एसडीएम सदर अनुभव सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, बैनामे के समय जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया और जमीन को गलत तरीके से फ्रीहोल्ड दिखाया गया। वर्तमान में सर्किल रेट के अनुसार इस बेशकीमती जमीन की कीमत लगभग 24 करोड़ 77 लाख रुपये आंकी गई है।

अदालत में लंबित था विवाद फिर भी अरबों की संपत्ति का हुआ बैनामा

कानपुर में नजूल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का यह अवैध कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस विवादित संपत्ति को लेकर सिविल न्यायालय में पहले से ही वाद संख्या 39/2022 विचाराधीन है। जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब अमेरिका में रह रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है ताकि सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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