मजदूर पिता के बेटे ने यूपी बोर्ड में रचा इतिहास, अभावों को मात देकर अभिषेक ने टॉप-10 में बनाई जगह

Uttar Pradesh News: अमरोहा जिले के एक छोटे से गांव से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है जो हर युवा को मेहनत का मतलब समझाएगी। कैसरजहां कयामुद्दीन इंटर कालेज के छात्र अभिषेक ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल की है। मजदूर पिता और पशुपालन करने वाली मां के इस बेटे ने अपनी काबिलियत से पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा है। यह वही छात्र है जिसने हाईस्कूल में भी टॉप-10 में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

गणित में लगातार दूसरी बार पाए 100 में से 100 अंक

अभिषेक ने न केवल प्रदेश स्तर पर सातवां स्थान प्राप्त किया बल्कि अपने मंडल और जिले में पहला स्थान भी सुरक्षित किया। उनकी इस उपलब्धि का सबसे खास पहलू गणित विषय में शत-प्रतिशत अंक रहे। हाईस्कूल 2024 में भी उन्होंने गणित में 100 अंक प्राप्त कर प्रदेश में सातवां स्थान हासिल किया था। लगातार दूसरी बोर्ड परीक्षा में गणित में पूर्ण अंक लाना उनकी गहरी समझ और निरंतर अभ्यास को दर्शाता है। उनकी सफलता का सिलसिला दो वर्षों से बरकरार है।

कांठ क्षेत्र के छोटे से गांव से निकला यह हीरा

भैसली जमालपुर उर्फ गदापुर निवासी अभिषेक का जीवन बेहद साधारण और संघर्षपूर्ण रहा है। पिता ऋषिपाल एक दिहाड़ी मजदूर हैं जो कभी राजमिस्त्री के साथ मकानों की चिनाई करते हैं तो कभी खेतों में फसलों की कटाई का काम करते हैं। मां सीमा घर पर रहकर पशुपालन करती हैं और परिवार की आमदनी में अपना योगदान देती हैं। चार भाइयों के इस परिवार में आर्थिक तंगी हमेशा बनी रही लेकिन अभिषेक के माता-पिता ने शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।

बिना ट्यूशन के किया पूरी पढ़ाई का सफर

आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि अभिषेक किसी कोचिंग या ट्यूशन में दाखिला ले पाते। उन्होंने स्कूल की कक्षाओं में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम को ही अपनी सफलता का पूरा आधार बनाया। नियमित स्वाध्याय और स्कूल शिक्षकों के मार्गदर्शन के बल पर ही उन्होंने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। अभिषेक का मानना है कि संसाधन न होने के बावजूद अगर लगन और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उनकी यह सोच किसी भी अभावग्रस्त छात्र के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गई है।

कॉलेज प्रबंधन ने पूरी तरह माफ की थी फीस

अभिषेक की प्रतिभा और विपरीत आर्थिक परिस्थितियों को भांपते हुए कैसरजहां कयामुद्दीन इंटर कालेज के प्रबंधन ने उनकी पूरी फीस माफ कर दी थी। इतना ही नहीं, बोर्ड परीक्षा के लिए जमा होने वाला फॉर्म शुल्क भी स्कूल प्रबंधन ने अपनी ओर से भरा। कॉलेज के प्रबंधक अशोक कुमार के अनुसार अभिषेक शुरू से एक मेधावी और अनुशासित छात्र रहा है। ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों की आर्थिक मदद करना संस्था का सामाजिक दायित्व भी है और एक सार्थक निवेश भी। इस पहल से निस्संदेह अभिषेक को बिना किसी आर्थिक तनाव के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करने में बहुत मदद मिली।

बड़े भाई ने भी पिछले साल रचा था इतिहास

प्रतिभा का यह सफर इस परिवार में नया नहीं है। अभिषेक के बड़े भाई विशाल कुमार भी इसी विद्यालय के छात्र रहे हैं। विशाल ने पिछले वर्ष इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड परीक्षा में प्रदेश स्तर पर दसवां स्थान प्राप्त कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया था। दोनों भाइयों का लगातार प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान बनाना यह साबित करता है कि इस परिवार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों बेटों ने अपने माता-पिता के सपनों को पंख लगा दिए हैं।

यूपीएससी की तैयारी का सपना और खेलों में रुचि

भविष्य की योजनाओं को लेकर अभिषेक का नजरिया बेहद स्पष्ट है। वह स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं। यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास करने की चुनौती के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। पढ़ाई के अलावा अभिषेक को क्रिकेट और शतरंज खेलने का भी गहरा शौक है। उनका मानना है कि खेल मस्तिष्क को तरोताजा रखते हैं और एकाग्रता को बढ़ावा देते हैं जो किसी भी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए बेहद जरूरी गुण हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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