टेक जगत में हाहाकार! मेटा और माइक्रोसॉफ्ट से 23,000 कर्मचारी बाहर, क्या AI छीन लेगा सबकी नौकरियां?

Global Tech News: दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक दिग्गज कंपनियां मेटा और माइक्रोसॉफ्ट एक साथ बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही हैं। दोनों कंपनियों के इस कदम से करीब 23,000 नौकरियों पर सीधा असर पड़ेगा। इस फैसले का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहा भारी खर्च और ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करना है। मेटा आगामी 20 मई 2026 से अपने 10 फीसदी वर्कफोर्स यानी 8,000 लोगों को बाहर कर देगी। इसके अलावा कंपनी ने 6,000 खाली पदों को भी खत्म कर दिया है।

मेटा में 8,000 नौकरियों पर गिरी गाज

मेटा की चीफ पीपल ऑफिसर जेनेल गेल ने एक इंटरनल मेमो के जरिए इस फैसले की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी को बेहतर तरीके से चलाने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य है। कंपनी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश कर रही है, जिसे मैनेज करने के लिए लागत घटाना जरूरी है। कर्मचारी पिछले कई महीनों से इस आशंका में थे। कंपनी ने प्लान लीक होने के कारण इसकी आधिकारिक घोषणा समय से पहले कर दी है।

माइक्रोसॉफ्ट के 51 साल के इतिहास में पहली बार बड़ा फैसला

माइक्रोसॉफ्ट ने अपने 51 साल के इतिहास में पहली बार अमेरिकी कर्मचारियों के लिए ‘वॉलेंटियर बायआउट’ प्रोग्राम का ऐलान किया है। कंपनी के अमेरिका में करीब 1.25 लाख कर्मचारी हैं, जिनमें से 8,750 को यह ऑफर मिलेगा। यह ऑफर उन लोगों के लिए है जिनकी उम्र और सेवा अवधि का योग 70 या उससे अधिक है। कंपनी खुद पैसा देकर कर्मचारियों को स्वेच्छा से पद छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। यह सीधे लेऑफ से बिल्कुल अलग प्रक्रिया है।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का भारी निवेश

माइक्रोसॉफ्ट की चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन के अनुसार, कंपनी एआई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटर्स बना रही है। इसके लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड तोड़ अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। मेटा ने भी एआई पार्टनर्स के साथ कई बड़ी डील्स की हैं। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट जापान और ऑस्ट्रेलिया में नए निवेश की घोषणा कर चुकी है। इन खर्चों को संतुलित करने के लिए कंपनियां अब अपनी पुरानी वर्कफोर्स और ऑपरेशंस में कटौती कर रही हैं।

कर्मचारियों के लिए क्या हैं वित्तीय विकल्प?

माइक्रोसॉफ्ट के वॉलेंटियर बायआउट प्रोग्राम के तहत कर्मचारियों को एक आकर्षक वित्तीय भुगतान यानी कैश पेआउट दिया जाएगा। हालांकि कंपनी ने अभी तक सटीक राशि का खुलासा नहीं किया है। मेटा में भी छंटनी का माहौल पिछले एक साल से तनावपूर्ण बना हुआ है। इससे पहले भी रियलिटी लैब्स और अन्य डिवीजन पर असर पड़ा था। अनुभवी कर्मचारियों के पास अब यह कठिन विकल्प है कि वे स्वेच्छा से कंपनी छोड़ें या भविष्य की अनिश्चितताओं का सामना करें।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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