भारत और रूस की महाडील: अब पुतिन की धरती पर उगेगा सोना, देश के किसानों की चमकेगी किस्मत!

India-Russia News: भारत अब अपनी खाद सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए सात समंदर पार एक बड़ा दांव खेलने जा रहा है। रूसी कंपनी यूरालकेम के साथ मिलकर भारत की तीन दिग्गज कंपनियां रूस की धरती पर एक विशाल यूरिया प्लांट स्थापित करेंगी। इस मेगा प्रोजेक्ट की वार्षिक क्षमता 20 लाख टन होगी, जिसे अगले दो वर्षों में शुरू करने का लक्ष्य है। यह कदम भारत के लिए उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

रूस में भारतीय निवेश: खाद की कमी को हमेशा के लिए खत्म करने का मास्टरप्लान

प्रस्तावित यूरिया संयंत्र रूस के तोग्लियात्ती (समारा) क्षेत्र में लगाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां तैयार होने वाला शत-प्रतिशत यूरिया केवल भारत को ही निर्यात किया जाएगा। कच्चे माल के तौर पर जरूरी अमोनिया की आपूर्ति खुद रूस करेगा। इस रणनीतिक साझेदारी से वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भारतीय किसानों पर नहीं पड़ेगा। यह परियोजना भारत को अंतरराष्ट्रीय खाद संकट से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी।

शिखर सम्मेलन में बनी थी सहमति: प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज

इस संयुक्त उद्यम की नींव दिसंबर 2025 में हुई भारत-रूस शिखर बैठक के दौरान रखी गई थी। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर अपनी औपचारिक मुहर लगा दी थी। अब उर्वरक मंत्रालय की एजेंसी पीडीआईएल (PDIL) ने अपनी प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट कंपनियों को सौंप दी है। भारतीय कंपनियां वर्तमान में इस रिपोर्ट का तकनीकी और आर्थिक पहलुओं से अध्ययन कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो महीनों में निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत हो सकती है।

आईपीएल, आरसीएफ और एनएफएल का बड़ा दांव: 10 हजार करोड़ का निवेश

इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) शामिल हैं। निवेश के मोर्चे पर यूरालकेम लगभग 10,000 करोड़ रुपये लगाएगी। वहीं, भारतीय हिस्सेदारी में आईपीएल और आरसीएफ 4,500-4,500 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। एनएफएल की ओर से 1,000 करोड़ रुपये की पूंजी लगाई जाएगी। जब तक प्लांट चालू नहीं होता, तब तक भारतीय कंपनियां ही इसके वित्तपोषण की मुख्य जिम्मेदारी संभालेंगी, जिससे प्रोजेक्ट की रफ्तार बनी रहे।

आयात पर निर्भरता होगी कम: भारत-रूस दोस्ती का नया अध्याय

भारत अपनी जरूरतों के लिए रूस से भारी मात्रा में उर्वरक आयात करता है। वर्ष 2025 में यह व्यापार 3 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जो पिछले सालों के मुकाबले 40 प्रतिशत अधिक है। रूस में अपना प्लांट होने से भारत की आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी। आईपीएल के प्रबंध निदेशक पीएस गहलौत ने कहा कि यह उद्यम देश को उन संकटों से बचाएगा, जब बड़े निर्यातक देश अचानक आपूर्ति घटा देते हैं। यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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