‘अकेले चोरी पर सजा, मिलकर लूटने पर छूट’, दलबदल कानून पर शांता कुमार का बड़ा प्रहार

Himachal News: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने देश के दलबदल कानून पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि भारत में यह कानून अपने मूल उद्देश्य को पाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। शांता कुमार ने इस कानून की मौजूदा कमियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में राजनीतिक लाभ के लिए नियमों का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। सामूहिक दलबदल करने वालों पर कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है।

कानून की खामियों पर उठाया बड़ा सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कानून की विसंगतियों को सटीक उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था काफी अजीब हो चुकी है। अगर कोई व्यक्ति अकेले चोरी करता है, तो उसे तुरंत सजा मिलती है। लेकिन जब पूरा समूह मिलकर घर लूट लेता है, तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। शांता कुमार ने सांसदों के सामूहिक दलबदल का सीधा उदाहरण दिया है। उन्होंने इसे कानून की सबसे बड़ी कमजोरी बताया।

राजनीति के गिरते स्तर पर जताई चिंता

वरिष्ठ नेता ने देश की राजनीति के लगातार गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पुराने समय में राजनीति केवल सेवा, ईमानदारी और राष्ट्रहित के लिए की जाती थी। लेकिन आज के दौर में इसका मकसद सिर्फ सत्ता हासिल करना रह गया है। शांता कुमार ने भगत सिंह जैसे महान देशभक्तों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति सिर्फ स्वार्थ का केंद्र बन चुकी है।

कानून में सख्त बदलाव करने की जोरदार मांग

शांता कुमार ने देश के सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से एक विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दलबदल कानून पर तुरंत पुनर्विचार करने की भारी जरूरत है। सरकार को संसद में ऐसे नए और कड़े प्रावधान लाने चाहिए। इन नए नियमों के तहत सामूहिक रूप से पार्टी बदलने को भी पूरी तरह दंडनीय अपराध माना जाए। उनका मानना है कि सख्त कानून के बिना साफ-सुथरी राजनीति बिल्कुल असंभव है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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