New Delhi News: दुनिया के बैंकों पर बड़े साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिल्ली में एक अहम बैठक की है। इसमें रिजर्व बैंक और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हिस्सा लिया। बैंकों को खतरे से निपटने के लिए सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यह खतरा एंथ्रोपिक कंपनी के ताकतवर एआई मॉडल क्लॉड मिथोस से पैदा हुआ है। इस कंप्यूटर प्रोग्राम ने सारी दुनिया की सरकारों को डरा दिया है।
क्या है क्लॉड मिथोस और क्यों मचा है हड़कंप?
अमेरिका की मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने क्लॉड मिथोस नाम का नया सिस्टम बनाया है। कंपनी का मुख्य मकसद कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करना था। अक्सर हैकर बैंकों और कंपनियों के कंप्यूटर में घुसकर डेटा या पैसे चुरा लेते हैं। एंथ्रोपिक ने सोचा कि अगर एआई का इस्तेमाल किया जाए तो हैकर्स की चालों को नाकाम किया जा सकता है। यह प्रोग्राम सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को ढूंढने के लिए बनाया गया था।
टेस्टिंग में सामने आई हैरान करने वाली सच्चाई
कंपनी ने जब इस नए एआई मॉडल की टेस्टिंग शुरू की तो नतीजे देखकर खुद इंजीनियर भी हैरान रह गए। क्लॉड मिथोस ने दुनिया की बड़ी कंपनियों के सॉफ्टवेयर में पुरानी कमजोरियां कुछ मिनटों में खोज निकालीं। इन नेटवर्क में पिछले तीस सालों से कमजोर कड़ियां मौजूद थीं। विशेषज्ञों को जो काम करने में सालों लगते, इस प्रोग्राम ने वह काम तुरंत कर दिया। इसकी यह रफ्तार ही सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
एआई हैकर बन जाए तो कौन बचाएगा सिस्टम?
इस टेस्टिंग के बाद कंपनी घबरा गई और उसने इसे बाजार में नहीं उतारने का फैसला किया। कंपनी को डर है कि यह कोई भी पासवर्ड या ताला आसानी से तोड़ सकता है। अगर यह प्रोग्राम किसी गलत हाथ में लग गया तो बैंकों के अकाउंट मिनटों में साफ हो जाएंगे। इसे कंप्यूटर सुरक्षा सुधारने के लिए बनाया गया था। लेकिन अगर यह खुद चोरी करने लगे तो कोई भी पासवर्ड इसे रोक नहीं पाएगा।
इंसानी दिमाग से भी ज्यादा स्मार्ट है यह टूल
क्लॉड मिथोस केवल लिखने और पढ़ने में ही तेज नहीं है बल्कि कंप्यूटर हैकिंग में भी उस्ताद है। यह सुरक्षा के मामलों में इंसानों से कहीं ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम करता है। इसने एक वेब ब्राउजर में मौजूद चार कमजोरियों को जोड़कर एक खतरनाक साइबर हमला तैयार किया। इसने सिस्टम की पूरी सुरक्षा को आसानी से भेद दिया। ऐसा जटिल काम करने के लिए सामान्य तौर पर एक अनुभवी हैकर को काफी समय लगता है।
चुनिंदा कंपनियों को दिया गया है यह सिस्टम
खतरे को भांपते हुए एंथ्रोपिक ने इस मॉडल को आम लोगों के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। कंपनी ने अभी केवल कुछ भरोसेमंद और बड़ी कंपनियों को ही इसके ट्रायल की अनुमति दी है। इनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, एप्पल और क्राउडस्ट्राइक जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों को भी इस सिस्टम के इस्तेमाल पर कई सख्त लिमिट लगाकर दी गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों को अपने नेटवर्क की सुरक्षा जांचने में मदद करना है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट से पूरी दुनिया में फैली दहशत
अगर यह सिस्टम सिर्फ सुरक्षित हाथों में है तो फिर सरकारें क्यों डर रही हैं? इसका सीधा कारण ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्लॉड मिथोस गलती से कुछ अज्ञात लोगों के हाथ लग चुका है। हालांकि एंथ्रोपिक कंपनी ने इस दावे का खंडन किया है। कंपनी इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या तीसरे पक्ष के वेंडर के जरिए इस मॉडल तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई है।
क्या होगा अगर सिस्टम हैकर्स के हाथ लग गया?
अगर यह एआई प्रोग्राम हैकर्स के हाथ लग जाता है तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। कोई भी हैकर आसानी से किसी देश के रिजर्व बैंक में घुसकर पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है। सरकारी डाटा, रक्षा प्रणाली और अस्पतालों के नेटवर्क को पल भर में हैक किया जा सकता है। सेना के नेटवर्क में घुसकर मिसाइल और टैंकों का कंट्रोल हैकर्स अपने हाथ में ले सकते हैं। इसीलिए पूरी दुनिया में खतरे की घंटी बज चुकी है।
भारत में साइबर सुरक्षा को लेकर क्या हैं तैयारियां?
भारत में इस खतरे को लेकर सबसे ऊंचे स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय ने सभी बैंकों को अपनी साइबर सुरक्षा और ज्यादा मजबूत करने का आदेश दिया है। बैंकों से कहा गया है कि वे बेहतरीन साइबर विशेषज्ञों को काम पर रखें। इसके अलावा रियल टाइम में खतरे की जानकारी शेयर करने के लिए एक सुरक्षित तंत्र बनाया जा रहा है। भारत सरकार लगातार एंथ्रोपिक कंपनी के सीधे संपर्क में है और जानकारी जुटा रही है।
खतरा टला नहीं है, सतर्कता ही एकमात्र बचाव
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह एआई मॉडल वास्तव में गलत हाथों में गया है या नहीं। फिलहाल दुनिया भर में किसी भी बड़े साइबर हमले की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी खतरा बहुत बड़ा और वास्तविक है। दुनिया भर के बैंकों में करोड़ों लोगों की कमाई और निजी डाटा जमा है। अगर सुरक्षा चक्र टूटता है तो नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए इस संभावित तूफान से पहले सतर्कता जरूरी है।
