International News: वैश्विक टेक जगत में एक बार फिर नौकरियों पर छंटनी की काली छाया मंडराने लगी है। दिग्गज टेक कंपनियां मेटा और माइक्रोसॉफ्ट ने अपने खर्चों में कटौती करने के लिए बड़े बदलावों का संकेत दिया है। इन फैसलों से आने वाले दिनों में करीब 23,000 कर्मचारियों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीक में भारी निवेश करने के लिए अपने मौजूदा वर्कफोर्स को कम करने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
मेटा की 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छुट्टी की तैयारी
मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली कंपनी मेटा ने अपने आंतरिक ऑपरेशंस को अधिक कुशल बनाने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है। कंपनी ने एक इंटरनल नोट के जरिए स्पष्ट किया है कि वह अपने कुल वर्कफोर्स में 10 प्रतिशत की कमी करने की योजना बना रही है। इस निर्णय से लगभग 8000 कर्मचारियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त कंपनी ने 6000 खाली पड़े पदों को भी न भरने का फैसला लिया है ताकि वित्तीय बोझ को कम किया जा सके।
माइक्रोसॉफ्ट का वॉलंटरी बायआउट का अनोखा प्रस्ताव
सॉफ्टवेयर जगत की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने अमेरिकी कर्मचारियों के लिए एक नया ‘वॉलंटरी बायआउट’ प्लान पेश किया है। इस स्कीम के तहत कंपनी के लगभग 7 प्रतिशत अमेरिकी कर्मचारी इसके दायरे में आ सकते हैं, जिनकी संख्या करीब 8750 के आसपास है। कंपनी ने विशेष रूप से उन वरिष्ठ कर्मचारियों को प्राथमिकता दी है जिनकी उम्र और सेवा की अवधि का योग 70 वर्ष या उससे अधिक है। माइक्रोसॉफ्ट के इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर बायआउट का यह पहला मामला माना जा रहा है।
एआई निवेश के कारण बदला कंपनियों का रुख
टेक कंपनियों के इस कठोर फैसले के पीछे मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में हो रहा अरबों डॉलर का भारी निवेश है। माइक्रोसॉफ्ट इस समय पूरी दुनिया में नए डेटा सेंटर स्थापित कर रही है और हाल ही में जापान व ऑस्ट्रेलिया में बड़े निवेश की घोषणा की है। वहीं मेटा भी अपने एआई प्रोजेक्ट्स और पार्टनरशिप को लेकर काफी आक्रामक नजर आ रही है। इन महंगे प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से कंपनियां अब मानव संसाधन पर होने वाले खर्च में कटौती कर रही हैं।
