ठाणे कोर्ट का बड़ा फैसला: रिश्तेदार पर दुष्कर्म और गर्भपात के आरोप साबित नहीं, आरोपी हुआ बरी

Thane News: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने एक 34 वर्षीय व्यक्ति को अपनी रिश्तेदार के साथ कथित दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेमल एस विठलानी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पीड़िता और उसके भाई समेत प्रमुख गवाह अपनी पिछली बातों से मुकर गए।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत था मामला

कालवा निवासी आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 68(ए) और 88 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। यह धाराएं किसी विश्वासपूर्ण रिश्ते का दुरुपयोग कर यौन संबंध बनाने और महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराने से संबंधित हैं। 18 अप्रैल को दिए गए इस अदालती आदेश की प्रति सोमवार को सार्वजनिक की गई। अदालत ने पाया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका।

पीड़िता ने गवाही में ‘सहमति’ की बात स्वीकार की

अभियोजन पक्ष का दावा था कि पीड़िता 2021 में अपनी बड़ी बहन की मदद करने के लिए आरोपी के घर आई थी, जहां उसके साथ जबरदस्ती की गई। हालांकि, सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अपनी गवाही में स्पष्ट किया कि उनके बीच का संबंध पूरी तरह सहमति से था। न्यायाधीश ने संज्ञान लिया कि धारा 68(ए) के तहत अपराध साबित करने के लिए विश्वास का दुरुपयोग कर बहकाने की बात सिद्ध होनी चाहिए, जो इस मामले में नहीं पाई गई।

गवाहों के पलटने से कमजोर पड़ा अभियोजन का पक्ष

अदालत की कार्यवाही के दौरान पीड़िता के भाई ने भी किसी भी तरह के उत्पीड़न या अपनी बहन की गर्भावस्था के बारे में जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। न्यायाधीश विठलानी ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असमर्थ रहा कि आरोपी ने पीड़िता को डराया-धमकाया या उसे फुसलाकर कोई आपराधिक कृत्य किया था। गवाहों के मुकर जाने के कारण अभियोजन का पूरा ढांचा धराशायी हो गया।

विश्वासपूर्ण संबंधों के दुरुपयोग पर कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब स्वयं मुख्य गवाह ही आरोपों का समर्थन न करें। अदालत ने यह भी पाया कि पीड़िता द्वारा संबंध को सहमति से बताए जाने के बाद आपराधिक धमकी या बहकाने की बात बेबुनियाद हो जाती है। इन तमाम तथ्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए, ठाणे अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से सम्मानपूर्वक बरी करने का आदेश जारी किया।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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