NCLT अध्यक्ष की कुर्सी का विवाद सुलझा, दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका को बताया ‘निरर्थक’; जानें क्या है पूरा मामला

Delhi News: राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब इस याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया है। इस फैसले के साथ ही अधिकरण के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता की स्थिति भी खत्म हो गई है।

जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल बने एनसीएलटी के नए अध्यक्ष

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओ. पी. शुक्ला की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के नए फैसले का हवाला दिया। पीठ ने बताया कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल को एनसीएलटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने 29 अप्रैल को उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। उन्हें पांच वर्षों के कार्यकाल के लिए इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।

क्यों दाखिल हुई थी कार्यकारी अध्यक्ष के खिलाफ याचिका?

यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब बाचू वेनकट बलराम दास को एनसीएलटी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस फैसले को एनसीएलटी के ही तकनीकी सदस्य कौशलेंद्र कुमार सिंह ने अदालत में चुनौती दी थी। सिंह का तर्क था कि कानून के मुताबिक, वरिष्ठतम सदस्य को ही कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया था कि उनकी नियुक्ति दास से पहले हुई थी, इसलिए वे इस पद के असली हकदार थे।

अदालत ने कार्यवाही समाप्त कर याचिका को ठहराया बेकार

उच्च न्यायालय ने तकनीकी सदस्य की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि अब नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति हो चुकी है, इसलिए कार्यकारी व्यवस्था से संबंधित रिट याचिका ‘निरर्थक’ हो गई है। अदालत ने कौशलेंद्र कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका पर चल रही सभी कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया। पीठ ने माना कि नए अध्यक्ष की जॉइनिंग के बाद वरिष्ठता के आधार पर कार्यकारी पद का दावा करने का कोई आधार नहीं बचता।

वरिष्ठता और नियुक्ति की तारीख पर छिड़ी थी रार

याचिकाकर्ता कौशलेंद्र कुमार सिंह ने मार्च में पहली बार उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने दावा किया था कि 16 मार्च को निवर्तमान अध्यक्ष के सेवानिवृत्त होने के बाद वह सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं। उनका कहना था कि वरिष्ठता का निर्धारण नियुक्ति की तिथि के आधार पर होना चाहिए, चाहे सदस्य न्यायिक हो या तकनीकी। इसी आधार पर उन्होंने दास की नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी।

केंद्र के फैसले से विवाद का स्थायी समाधान

केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति ग्रेवाल की नियुक्ति कर इस प्रशासनिक खींचतान पर विराम लगा दिया है। अब एनसीएलटी में अध्यक्ष पद की कमान एक पूर्व न्यायाधीश के हाथों में होगी। इससे पहले कार्यकारी अध्यक्ष के पद को लेकर अधिकरण के भीतर ही मतभेद उभरने लगे थे। अब हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अधिकरण में कामकाज सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है। यह फैसला न्यायिक संस्थानों में प्रशासनिक नियुक्तियों की पारदर्शिता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

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