राघव चड्ढा से क्यों खफा हुई Gen Z? परिणीति से शादी और दल बदलने के बाद ऐसे गिर रहा ग्राफ

Delhi News: आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता राघव चड्ढा को इन दिनों युवाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद से जेनरेशन जेड (Gen Z) के युवा उनसे खासे नाराज हैं। सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स तेजी से घट रहे हैं। कभी युवाओं के पसंदीदा और आम आदमी पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ रहे राघव से अब लोग किनारा कर रहे हैं। बिना किसी शोर-शराबे के युवा केवल अनफॉलो बटन दबाकर अपना कड़ा विरोध जता रहे हैं।

शांत और सुलझी हुई छवि को लगा बड़ा झटका

राघव चड्ढा एक शांत और आधुनिक युवा राजनेता माने जाते थे। उनका स्वभाव बेहद सामान्य था। वह युवाओं के बीच ‘पड़ोस के लड़के’ की तरह दिखते थे। उनका ‘ब्लिंकिट’ वाला वीडियो भी काफी मशहूर हुआ था। दल बदलने के बाद उनकी इस साफ छवि को गहरा धक्का लगा है। जेनरेशन जेड के युवाओं को उनका यह कदम पुरानी और गंदी राजनीति की वापसी जैसा लग रहा है। अब युवा उनका लगातार कड़ा विरोध कर रहे हैं।

परिणीति चोपड़ा से शादी और ग्लैमरस छवि का प्रभाव

अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से विवाह के बाद राघव चड्ढा की छवि में बड़ा बदलाव आया। इस शादी से लोगों के बीच उनके प्रति नई जिज्ञासा पैदा हुई। उनकी पहचान अब एक ग्लैमरस नेता के रूप में बन चुकी है। जिस युवा पीढ़ी ने उन्हें कभी सिर आंखों पर बिठाया था, वह अब उनसे धीरे-धीरे दूरी बना रही है। जानकारों के अनुसार, राजनीति में किसी नेता की छवि बहुत नाजुक होती है और इसे हमेशा बनाए रखना बेहद मुश्किल काम है।

आदर्शवाद छोड़ने पर युवा समर्थकों की भारी निराशा

जेएनयू के प्रोफेसर अजय गुडवर्ती के अनुसार, युवा वर्ग सांसदों से स्वच्छ राजनीति की उम्मीद करता है। चड्ढा ने खुद को आम जनता से जुड़े नेता के रूप में पेश किया था। हाल के राजनीतिक बदलावों ने उनके युवा समर्थकों को बुरी तरह निराश कर दिया है। जेनरेशन जेड के युवा विश्वासघात और स्वार्थ की राजनीति बिल्कुल पसंद नहीं करते। जब उन्हें लगता है कि नेता आदर्शवाद छोड़ रहा है, तो वे तुरंत कड़ा दंड देते हैं।

अनफॉलो करना बन गया है विरोध का नया आधुनिक हथियार

डिजिटल दुनिया में किसी को अनफॉलो करना अब महज तकनीकी क्रिया नहीं रही। यह बिना शोर मचाए अपनी असहमति दर्ज कराने का नया राजनीतिक बयान बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल होना आसान है, लेकिन सकारात्मक लोकप्रियता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। राघव की ऑनलाइन पहचान के कारण अब उनके हर कदम की बारीकी से जांच हो रही है। डिजिटल स्पेस में अपनी साख बचाने के लिए नेताओं को पारदर्शी और प्रासंगिक बने रहना बहुत आवश्यक हो गया है।

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