Dehradun News: उत्तराखंड सरकार ने सेना से सेवा पूरी कर अगले वर्ष लौटने वाले अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में समायोजित करने की कवायद तेज कर दी है। राज्य प्रशासन अब उन पदों का सटीक आकलन कर रहा है, जिन पर वर्ष 2027 से वापस आने वाले युवाओं को नियुक्ति दी जा सकेगी। इसके लिए सभी सरकारी विभागों से वर्तमान रिक्तियों और भविष्य के संभावित पदों का विस्तृत ब्योरा तलब किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य इन प्रशिक्षित युवाओं के कौशल का लाभ प्रदेश के विकास में लेना है।
अग्निपथ योजना और समायोजन की रणनीति
केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत युवाओं को चार वर्ष के लिए सेना में सेवा का अवसर मिलता है। सेवा अवधि पूर्ण होने के पश्चात पच्चीस प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में ही स्थायी कमीशन दिया जाता है। शेष पचहत्तर प्रतिशत अग्निवीरों को नागरिक जीवन में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकारें प्राथमिकता दे रही हैं। उत्तराखंड शासन ने इस दिशा में अब ठोस कदम उठाते हुए विभागीय स्तर पर आंकड़ों का मिलान शुरू कर दिया है।
केंद्र की निगरानी और राज्यों से रिपोर्ट तलब
अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर केंद्र सरकार विशेष रूप से सक्रिय है। केंद्र ने सभी राज्य सरकारों से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है कि उन्होंने पूर्व सैनिकों की तर्ज पर अग्निवीरों के लिए क्या विशेष कदम उठाए हैं। राज्यों को यह भी बताना होगा कि उनके यहां आने वाले वर्षों में कितने पद रिक्त रह सकते हैं। सेना से प्राप्त अनुशासन और तकनीकी दक्षता के कारण इन युवाओं को सरकारी तंत्र में शामिल करना प्रशासन के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होगा।
प्रदेश के हजारों युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ
एक सरकारी आकलन के अनुसार, उत्तराखंड के साढ़े चार हजार से अधिक युवा वर्तमान में विभिन्न रेजिमेंटों में अग्निवीर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2027 में इनकी पहली बड़ी खेप अपनी सेवा पूरी कर प्रदेश वापस लौटेगी। इन युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए धामी सरकार पहले ही राज्य की सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय ले चुकी है। अब इस आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए रिक्तियों की पहचान की जा रही है।
इन प्रमुख विभागों में मिलेगी प्राथमिकता
शासन स्तर पर पुलिस, परिवहन, आपदा प्रबंधन, वन और होमगार्ड जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पदों की उपलब्धता जांची जा रही है। इसके अलावा कारागार और अन्य सुरक्षा संबंधी विभागों में भी अग्निवीरों को प्राथमिकता दी जाएगी। सचिव गृह शैलेश बगौली ने बताया कि प्रदेश में आरक्षण की व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है। अब केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागवार आंकड़ों को संकलित किया जा रहा है, ताकि युवाओं की घर वापसी पर उन्हें तत्काल रोजगार के अवसर मिल सकें।

