सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल बाद भी पाकिस्तान को पानी नहीं

New Delhi News: भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक सिंधु जल संधि बहाल नहीं होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन छोड़ना होगा। भारत अपनी सुरक्षा के लिए कड़े फैसले लेना जारी रखेगा। नई दिल्ली में हुई प्रेस ब्रीफिंग में सरकार ने अपनी रणनीतिक स्थिति स्पष्ट कर दी है।

आतंकवाद और जल संधि पर विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की याद दिलाई। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारत ने इस हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को अब विश्वसनीय और स्थायी बदलाव दिखाने होंगे।

ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत का करारा जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर भारतीय सशस्त्र बलों की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। भारतीय सेना ने सटीकता और पेशेवर क्षमता के साथ आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था। यह मिशन पाकिस्तान और पीओके में सक्रिय आतंकी कैंपों को ध्वस्त करने के लिए शुरू किया गया था। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व भी कर रहा है।

चिनाब नदी पर बांधों के गेट अब भी बंद

रणनीतिक बदलाव के तहत भारत ने पिछले एक साल से प्रमुख बांधों के गेट बंद रखे हैं। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में स्थित बगलिहार बांध (Baglihar Dam) के सभी गेट फिलहाल बंद हैं। यह महत्वपूर्ण बांध चिनाब नदी पर बना है जो सिंधु जल संधि का हिस्सा है। भारत की यह कार्रवाई पाकिस्तान पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। एक साल बीत जाने के बाद भी भारत ने अपनी नीति नहीं बदली है।

ऐतिहासिक सिंधु जल संधि और वर्तमान संकट

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी। दशकों तक यह समझौता दोनों देशों के बीच नदी जल बंटवारे का मुख्य आधार रहा है। हालांकि, सीमा पार से बढ़ते तनाव और आतंकी हमलों ने इस समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत ने अब ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’ की नीति को कड़ाई से लागू किया है। पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती बन गई है।

भविष्य की कूटनीति और भारत का कड़ा संकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख पाकिस्तान की ‘प्रॉक्सी वॉर’ रणनीति को विफल करने के लिए है। केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान को बेनकाब करने का काम तेज कर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ यह याद दिलाती है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक सुरक्षा नीति पर चल रहा है। पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों के सम्मान के लिए अपनी आतंकी गतिविधियों को रोकना ही होगा।

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