Jammu Kashmir News: पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इस हमले में छब्बीस नागरिकों की जान गई। इसके जवाब में भारतीय बलों ने ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस व्यापक सैन्य अभियान के तहत पाकिस्तान और पीओके स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। इस सख्त कार्रवाई से भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमा पार आतंकवाद को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पहलगाम में आम नागरिकों पर हमला
बाइस अप्रैल को कश्मीर के खूबसूरत पर्यटक स्थल पहलगाम में आतंकवादियों ने एक कायरतापूर्ण हमला किया था। पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकी संगठन टीआरएफ के आतंकियों ने इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया। उन्होंने धर्म के आधार पर लोगों को अलग करके छब्बीस निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी। घटना के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी। उन्होंने छिपे हुए आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एक बहुत बड़ा सर्च ऑपरेशन भी शुरू किया।
भारत सरकार का सख्त कूटनीतिक रुख
इस भीषण हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अत्यंत सख्त रुख अख्तियार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत हर आतंकी और उनके आकाओं को खोजकर कड़ी सजा देगा। इसके तहत भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सभी राजनयिक संबंधों को तुरंत सीमित कर दिया। रणनीतिक दबाव बनाने के लिए इंडस वाटर ट्रीटी को भी तत्काल रोक दिया गया। इसके अलावा सीमाओं को सील कर दिया गया और सभी पाकिस्तानी राजनयिकों को भारत छोड़ने का आदेश दे दिया गया।
ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सैन्य प्रहार
सात मई को भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अंदर मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर अचूक हमला किया गया। इन ठिकानों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के बड़े प्रशिक्षण कैंप शामिल थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि इस पूरी कार्रवाई में सौ से अधिक खूंखार आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया गया है।
सेना को पूरी छूट और कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सेना को पूरी तरह से स्वतंत्र कार्रवाई करने का अधिकार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान ने गोली चलाई, तो भारत उसका और भी भयंकर जवाब देगा। इस कार्रवाई से दो परमाणु संपन्न देशों के बीच सीधा और बड़ा टकराव शुरू हो गया। हालांकि एक सफल सैन्य ऑपरेशन के जरिए भारत ने परमाणु धमकियों के डर को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और दुश्मनों को उनकी असली जगह दिखा दी।
अमेरिका का दखल और स्पष्ट भारतीय नीति
नौ मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वॉन्स ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर गंभीर बातचीत की। उन्होंने जानकारी दी कि पाकिस्तान इस तनाव को एक पूर्ण युद्ध में बदलने की खतरनाक तैयारी कर रहा है। भारत ने इस जानकारी को गंभीरता से लिया लेकिन किसी भी दबाव में झुकने से साफ इनकार कर दिया। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार के न्यूक्लियर ब्लैकमेल को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और सख्त जवाब देगा।
पाकिस्तानी ड्रोन हमले और भारत का पलटवार
हताशा छिपाने के लिए अगले दिन पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी। पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर लगभग चार सौ ड्रोन दागे। इस हमले में सोलह भारतीय नागरिकों की जान चली गई। हालांकि भारत की आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली एस-400 ने दुश्मनों के अधिकांश हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लाहौर में तैनात चीनी मूल के मिसाइल सिस्टम को नष्ट कर दिया।
सीजफायर समझौता और भविष्य की रणनीतिक स्थिति
चार दिनों तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच शांति वार्ता हुई। दस मई को शाम पांच बजे सीजफायर समझौते पर मुहर लगी और सभी सैन्य कार्रवाइयां रोक दी गईं। इस अभियान के दौरान भारतीय सेना ने दुश्मन को बहुत भारी नुकसान पहुंचाया। अब दोनों देश फिर से एक अस्थिर शांति के दौर में लौट आए हैं, लेकिन भारत की अत्यंत मजबूत रणनीतिक स्थिति पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट है।

