उत्तराखंड में मजबूत होगा स्वास्थ्य ढांचा: चारधाम यात्रा मार्ग समेत प्रदेश में खुलेंगे चार नए ट्रॉमा सेंटर

Dehradun News: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य में जल्द ही चार नए ट्रॉमा सेंटर खोले जाएंगे, जिनमें से पहला श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में स्थापित होगा। बाकी तीन केंद्रों के लिए उपयुक्त स्थानों के चयन की प्रक्रिया प्रशासन ने शुरू कर दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों और चारधाम यात्रा मार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के घायलों को ‘गोल्डन आवर’ के भीतर त्वरित इलाज उपलब्ध कराना है।

बढ़ते सड़क हादसों ने बढ़ाई सरकार की चिंता

उत्तराखंड में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य में 1,747 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 1,090 लोगों की मृत्यु हुई। वर्ष 2025 में इन हादसों की संख्या में और इजाफा देखा गया। भूस्खलन, खराब मौसम और गहरी खाइयों के कारण यहां होने वाली दुर्घटनाएं अक्सर जानलेवा साबित होती हैं। इसे देखते हुए सरकार अब इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

चारधाम यात्रा मार्ग पर विशेष सुरक्षा कवच

प्रदेश के चारधाम यात्रा मार्ग सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु इन संकरी और कठिन पहाड़ी सड़कों से होकर गुजरते हैं। भारी ट्रैफिक और मौसम के अचानक बदलाव से दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। वर्तमान में गंभीर मरीजों को ऋषिकेश या देहरादून रेफर करना पड़ता है। श्रीनगर में नए ट्रॉमा सेंटर के बनने से यात्रा मार्ग पर घायलों को समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सा मिल सकेगी।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है सबसे बड़ी चुनौती

नए ट्रॉमा सेंटर खोलने की योजना में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है। वर्तमान में न्यूरोसर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन और आईसीयू विशेषज्ञों के आधे से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। कई जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक मशीनें तो उपलब्ध हैं, लेकिन तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण वे सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं। सरकार अब इन रिक्त पदों को भरने और तकनीकी ढांचे को सुधारने पर काम कर रही है।

अन्य पहाड़ी राज्यों के मॉडल से ले रहे सीख

इमरजेंसी सेवाओं के विस्तार के लिए उत्तराखंड सरकार अन्य पहाड़ी राज्यों के मॉडलों का भी अध्ययन कर रही है। हिमाचल प्रदेश ने अपने ट्रॉमा नेटवर्क को तेजी से सुधारा है, जबकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ने एयर एंबुलेंस सेवाओं पर ध्यान दिया है। सिक्किम ने टेलीमेडिसिन आधारित इमरजेंसी मॉडल विकसित किया है। उत्तराखंड सरकार भी इन सफल प्रयोगों को अपनाकर अपने ट्रॉमा नेटवर्क को देश के सबसे मजबूत और प्रभावी स्वास्थ्य तंत्रों में से एक बनाना चाहती है।

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