Wales News: वेल्स के ऐतिहासिक पेमब्रोक कैसल के ठीक नीचे स्थित ‘वोगन कैवर्न’ में पुरातत्वविदों को चौकाने वाली सफलता मिली है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह स्थल ब्रिटेन की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक खोज साबित हो सकता है। ग्यारहवीं शताब्दी के इस प्रसिद्ध किले के नीचे छिपी गुफा में एक लाख साल से भी अधिक पुराने इंसानी और जानवरों के साक्ष्य मिले हैं। शोधकर्ताओं ने यहां प्राचीन पत्थर के औजारों के साथ-साथ विशालकाय मैमथ और ऊनी गैंडों की हड्डियां भी बरामद की हैं।
दुर्लभ जानवरों के अवशेषों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया
एबरडीन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को खुदाई के दौरान दरियाई घोड़े (हिप्पोपोटामस) की हड्डियां मिली हैं, जो अत्यंत दुर्लभ मानी जा रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये अवशेष लगभग 1,20,000 साल पुराने हो सकते हैं। उस सुदूर अतीत में ब्रिटेन की जलवायु आज के मुकाबले काफी गर्म हुआ करती थी, जिससे वेल्स जैसे क्षेत्रों में भी दरियाई घोड़े जैसे बड़े जीव आसानी से जीवित रह सकते थे। यह खोज प्राचीन ब्रिटेन के बदलते पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में मील का पत्थर साबित होगी।
निएंडरथल और होमो सेपियंस के पदचिह्न
पुरातत्वविदों का अनुमान है कि इस गुफा की गहराई में निएंडरथल मानवों और शुरुआती होमो सेपियंस के निशान भी छिपे हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह ब्रिटेन के प्राचीन मानव इतिहास के बारे में दुर्लभ और बहुमूल्य जानकारी प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि यह गुफा राजा हेनरी VII के जन्मस्थान पेमब्रोक कैसल के ठीक नीचे स्थित है। गुफा तक पहुंचने के लिए किले के भीतर से एक घुमावदार सीढ़ी बनाई गई है, जो ऐतिहासिक और वैज्ञानिक संगम को दर्शाती है।
आधुनिक खुदाई से खुली रहस्यों की परतें
लगभग 23 मीटर लंबी और 10 मीटर ऊंची यह गुफा कई दशकों तक उपेक्षित रही थी। लंबे समय तक पुरातत्वविदों का यह मानना था कि विक्टोरियन काल की अनियोजित खुदाई के कारण यहां के सभी वैज्ञानिक साक्ष्य नष्ट हो चुके होंगे। हालांकि, आधुनिक तकनीकों के साथ की गई ताजा खुदाई ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। मिट्टी की गहरी सतहों के नीचे अभी भी प्राचीन अवशेष पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शोध के नए द्वार खुल गए हैं।
ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व का केंद्र
वोगन कैवर्न की यह खोज न केवल विज्ञान बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। किले के नीचे मौजूद यह गुफा दर्शाती है कि कैसे हजारों सालों से यह स्थान विभिन्न प्रजातियों का आश्रय स्थल रहा है। दरियाई घोड़े, मैमथ और ऊनी गैंडों जैसे विलुप्त जीवों की मौजूदगी यह साबित करती है कि वेल्स का यह हिस्सा कभी विशाल वन्यजीवों से भरा हुआ था। फिलहाल विशेषज्ञ इन अवशेषों का प्रयोगशाला में विश्लेषण कर रहे हैं ताकि कालखंड का सटीक निर्धारण किया जा सके।

