भाजपा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ीं: पंजाब पुलिस ने किन गंभीर धाराओं में दर्ज की FIR? जानें पूरा सच!

Punjab News: राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल हुए पाठक के खिलाफ दो अलग-अलग जिलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने इन एफआईआर में कई गंभीर और गैर-जमानती धाराएं शामिल की हैं। इन कानूनी कार्रवाईयों के चलते संदीप पाठक की गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, जिससे राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ गया है।

लुधियाना और मोहाली में दर्ज हुए मुकदमे

संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब के लुधियाना और मोहाली के थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। लुधियाना में पुलिस ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोपों के तहत केस दर्ज किया है। वहीं मोहाली में दर्ज एफआईआर में सरकारी कामकाज में बाधा डालने और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार इन मामलों की जांच के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। शिकायतों की बारीकी से पड़ताल के बाद ही पुलिस ने यह सख्त कदम उठाया है।

क्या हैं संदीप पाठक पर लगे प्रमुख आरोप?

सांसद पर लगे आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी और गंभीर है। उन पर मुख्य रूप से धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) के आरोप हैं। इसके अलावा पंजाब पुलिस ने उन पर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पाठक ने अपने पद का दुरुपयोग किया और कुछ अनुचित लाभ प्राप्त किए। हालांकि भाजपा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। पुलिस अब इन आरोपों के समर्थन में सबूत जुटा रही है।

कानूनी दांवपेंच और गिरफ्तारी की आशंका

इन एफआईआर में गैर-जमानती धाराओं के होने से संदीप पाठक की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन धाराओं के तहत पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तार करने का अधिकार होता है। यही कारण है कि पाठक की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने की तैयारी चल रही है। भाजपा की लीगल टीम इस समय मोहाली और लुधियाना के अदालती दस्तावेजों का अध्ययन कर रही है। आने वाले कुछ घंटे पाठक के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

भाजपा और आप के बीच छिड़ा जुबानी जंग

संदीप पाठक पर हुई इस कार्रवाई ने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा ने इसे आम आदमी पार्टी की “बदले की राजनीति” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि पाठक के भाजपा में शामिल होने से ‘आप’ बौखला गई है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल राज्य में पुलिस अलर्ट पर है।

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