World News: मिडिल ईस्ट एक बार फिर भीषण युद्ध की दहलीज पर खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य कमांडरों के बीच हुई एक गुप्त बैठक ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है। इस उच्चस्तरीय मीटिंग में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजनाओं पर चर्चा हुई। यूएस सेंट्रल कमांड ने ट्रंप को तीन अलग-अलग रणनीतियों की जानकारी दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब कूटनीति छोड़कर सैन्य बल के इस्तेमाल पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने की खतरनाक योजना
सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप के सामने ईरान के पावर प्लांट और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य तेहरान की सरकार पर इतना दबाव बनाना है कि वह परमाणु मुद्दे पर अमेरिका की शर्तों को मान ले। ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक योजना में बेहद कम समय में जोरदार हवाई हमले करने की बात कही गई है। अमेरिका चाहता है कि इस हमले के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर किया जाए।
इजरायल में हथियारों का अंबार: अमेरिका ने भेजे 6500 टन घातक गोले
युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिका ने इजरायल को भारी मात्रा में हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटों में 6,500 टन गोला-बारूद और अत्याधुनिक सैन्य वाहन इजरायल पहुंचे हैं। इजरायली रक्षा मंत्रालय इसे ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ का हिस्सा बता रहा है। फरवरी से अब तक अमेरिका 400 से ज्यादा विमानों के जरिए भारी युद्ध सामग्री भेज चुका है। इतनी बड़ी सैन्य मदद यह संकेत देती है कि इस क्षेत्र में जल्द ही कोई बड़ा ऑपरेशन शुरू हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे और जमीनी सेना का बड़ा खतरा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के एक हिस्से पर नियंत्रण पाने की साहसिक योजना भी पेश की है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग है, जिसे वर्तमान में ईरान ने बाधित कर रखा है। ट्रंप इस मार्ग को वैश्विक व्यापार के लिए फिर से खोलने की कोशिश में हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए केवल हवाई हमले पर्याप्त नहीं होंगे। अमेरिका को वहां अपनी जमीनी सेना भी उतारनी पड़ सकती है, जिससे युद्ध लंबा और खूनी हो सकता है।
परमाणु मुद्दे पर ईरान को झुकाने की आखिरी कोशिश
अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना है कि बड़े सैन्य हमले की धमकी से ईरान अपनी परमाणु नीतियों में बदलाव करेगा। आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान पहले ही ईंधन और धन की भारी किल्लत से जूझ रहा है। अब बमबारी के डर से ट्रंप प्रशासन तेहरान को अपनी शर्तों पर शांति समझौता करने का अल्टीमेटम दे रहा है। इस तनावपूर्ण स्थिति का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका से पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है।


