‘मेरे आदेश अल्लाह के हुक्म जैसे’, तालिबान सुप्रीम लीडर के इस खौफनाक फरमान से सहमा अफगानिस्तान

Afghanistan News: अफगानिस्तान में तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित बयान दिया है। अखुंदजादा ने साफ कहा है कि उनके आदेशों का पालन करना अल्लाह और पैगंबर की आज्ञा मानने जैसा ही है। उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि अब उनके आदेशों की अवहेलना को बहुत बड़ा धार्मिक अपराध माना जाएगा। इसके खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान होगा। इस फरमान ने पूरे अफगानिस्तान में खौफ पैदा कर दिया है।

भ्रष्टाचार रोकने के लिए संपत्ति का देना होगा पूरा ब्योरा

तालिबान प्रमुख ने यह कड़ा बयान वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक अहम बैठक में दिया। सूत्रों के अनुसार उनका मुख्य मकसद प्रशासन में लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर पूरी तरह लगाम लगाना है। अखुंदजादा ने आदेश दिया है कि सरकार में हर पद पर नियुक्त व्यक्ति को अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा देना होगा। पद छोड़ते समय इस संपत्ति का कड़ा ऑडिट किया जाएगा।

पुलिस का नया नाम होगा ‘शुरता’, लागू होगा सख्त कानून

अगर ऑडिट के दौरान किसी भी अधिकारी की संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी पाई गई, तो उसे तुरंत सरकारी खजाने में जमा करा लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने देश में एक बड़े प्रशासनिक बदलाव का भी अहम संकेत दिया है। अफगानिस्तान में अब ‘पुलिस’ शब्द की जगह अरबी शब्द ‘शुरता’ का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए देश में बहुत जल्द एक नया और बेहद सख्त कानून लागू होने जा रहा है।

निजी मदरसों पर लगेगी रोक, शिक्षा मंत्रालय करेगा कंट्रोल

तालिबान प्रमुख ने अधिकारियों से साफ कहा है कि अब तक हुई हर तरह की अवज्ञा को वह माफ करते हैं। लेकिन भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही या अवहेलना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नया फरमान जारी किया है कि कोई भी अधिकारी अपनी मर्जी से नए मदरसे नहीं खोल सकता। जो निजी मदरसे पहले से चल रहे हैं, उन्हें भी तुरंत शिक्षा मंत्रालय के अधीन लाया जाएगा। निजी मदरसों में भारी भ्रष्टाचार की आशंका रहती है।

हर बैठक में धर्मगुरुओं की मौजूदगी हुई अनिवार्य

सुप्रीम लीडर ने यह भी साफ कर दिया है कि अब से हर अहम बैठक में धार्मिक विद्वानों का होना अनिवार्य होगा। चाहे बैठक तकनीकी हो या गैर-तकनीकी, धर्मगुरु उसमें जरूर शामिल होंगे। उनका मानना है कि सरकार के हर काम में धर्म की जरूरत सबसे ज्यादा है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की मध्यस्थता स्वीकार न की जाए। यह आदेश अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच आया है।

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