Washington News: अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की पुख्ता तैयारी कर रहा है। वह जल्द ही मिडिल ईस्ट में अपना सबसे आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम तैनात कर सकता है। अगर इस योजना को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह अमेरिकी सेना की डार्क ईगल मिसाइल की पहली ऑपरेशनल तैनाती होगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पेंटागन से इस बेहद खतरनाक हथियार को क्षेत्र में भेजने का सीधा अनुरोध किया है।
ईरान के अंदरूनी मिसाइल लॉन्चरों पर है अमेरिका की नजर
अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के उन बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को तबाह करना है, जो देश के अंदरूनी इलाकों में छिपे हुए हैं। ये निशाने पारंपरिक मिसाइलों की पहुंच से काफी दूर हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अपने लॉन्चरों को अमेरिकी पहुंच से बचाने के लिए 300 मील से अधिक दूर शिफ्ट कर दिया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अमेरिकी सेना इस लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल को तैनात करना चाहती है।
युद्धविराम के बीच भी मंडरा रहा है भारी तनाव
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 9 अप्रैल से युद्धविराम लागू है। हालांकि, अमेरिकी सेना के इस अनुरोध से साफ पता चलता है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव अभी भी चरम पर है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश इस शांति काल का उपयोग केवल अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में कर रहे हैं। अगर अमेरिका को डार्क ईगल तैनात करने की मंजूरी मिलती है, तो यह रूस और चीन के लिए भी एक बहुत कड़ा संदेश होगा।
जानिए ‘डार्क ईगल’ मिसाइल की खौफनाक खासियत
डार्क ईगल को लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन (LRHW) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 2,780 किलोमीटर से भी अधिक बताई जा रही है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसकी अत्याधुनिक तकनीक इसे किसी भी दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को आसानी से चकमा देने में सक्षम बनाती है। लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा विकसित इस एक मिसाइल की अनुमानित कीमत करीब 1.5 करोड़ डॉलर है।
अमेरिका ने जंग में झोंक दी अपनी आधी मिसाइलें
ईरान के साथ अब तक हुए संघर्ष में अमेरिका ने अपनी अधिकांश जेएएसएसएम-ईआर क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल कर लिया है। अमेरिकी सेना अब तक लगभग 1100 मिसाइलें ईरान पर दाग चुकी है। हालांकि अमेरिका हवाई श्रेष्ठता का दावा करता है, लेकिन उसके कई ड्रोन और लड़ाकू विमानों का नुकसान हुआ है। यह स्पष्ट रूप से साबित करता है कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम अभी भी अमेरिकी सेना के लिए बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है।
